नाले के रसायुक्त पानी ने जमीन के नीचे के पानी को भी विषैला बना दिया है। आसपास के लगते गांवों में। हाथ के नल और बोरवेल से निकलने वाला पानी रंगीन निकलता जा रहा है, जो अब पीने योग्य नहीं रहा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पानीपत के अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि चिह्नित किए गए सभी 51 अवैध बिंदुओं को स्थायी रूप से बंद किया जाएगा। साथ ही उन अधिकारियों और रसूखदारों की पहचान की जाएगी, जिन्होंने इन अवैध पॉइंट को बनवाने में मदद की। रात में गश्त बढ़ाकर टैंकरों के माध्यम से पानी डालने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
पानीपत। यमुना नदी का पानी दिन प्रतिदिन प्रदूषित होता जा रहा है। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के नौ जिलों से गुजरने वाले 11 बरसाती नाले के द्वारा रसायन युक्त पानी यमुना नदी में छोड़ा जा रहा है। इसमें पानीपत का नंबर दो बरसाती नाला ज्यादा खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। जिससे सीधे तौर पर भूजल प्रभावित हो रहा है। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा वर्तमान जांच में पानीपत का यह बरसाती नाला नंबर दो के किनारे 51 बिंदु चिह्नित किए हैं, जहां से फैक्ट्रियों का रसायन युक्त पानी नाले में डाला जा रहा है। गौरतलब है कि यहां फैक्ट्रियों द्वारा ट्रैक्टर-टैंकरों के माध्यम से रात के अंधेरे में चोरी-छिपे बरसाती नाले में छोडा जाता हैं। यह नाला रसलापुर और सनौली से होते हुए सीधे यमुना में मिलता है।













