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साहेबगंज-मनिहारी अंतर्राज्यीय फेरी घाट की हुई बंदोबस्ती 24.51लाख में तय


साहेबगंज-मनिहारी अंतर्राज्यीय फेरी घाट की हुई बंदोबस्ती 24.51लाख में तय

--बंदोबस्ती के लिए हुई डाक में तीन कंपनियों ने लिया भाग 
--डाक में शामिल होने के पूर्व ही महालक्ष्मी इंजीको इनजीकोन प्राइवेट लिमिटेड हुआ अयोग्य घोषित
 साहेबगंज: वर्ष 2020-21 एवं 2021-22 के लिए साहेबगंज-मनिहारी अंतर्राज्यीय फेरी घाट की खुली डाक में बंदोबस्ती की प्रक्रिया मंगलवार को पूरी कर ली गई। 24.51 लाख रुपए में सालाना  राजस्व की दर से यह बंदोबस्ती नाव यातायात सहयोग समिति साहेबगंज को तय की गई। उपायुक्त रामनिवास यादव के निर्देश पर अपर समाहर्ता अनुज कुमार प्रसाद की अगुवाई में समाना ले स्थित उनके कार्यालय कक्ष में मंगलवार की शाम यह बंदोबस्ती प्रक्रिया पूर्ण की गई। बंदोबस्ती में भाग लेने के लिए मंगलवार की सुबह 11 बजे तक आवेदन करने का समय सीमा प्रशासन की ओर संकेत किया गया था। निर्धारित समय तक तीन कंपनियों की ओर से बंदोबस्ती के लिए होने वाले डाक प्रक्रिया में भाग लेने के लिए तीन कंपनियों इनफिनिटी इंटरप्राइजेज साहिबगंज, नाव यातायात सहयोग समिति साहेबगंज तथा महालक्ष्मी इंजीको इनजीकोन प्राइवेट लिमिटेड ने आवेदन किया था। अनुमंडल पदाधिकारी पंकज कुमार साव की अगुवाई में जिला परिवहन पदाधिकारी एवं एमबीआई अमित कुमार दास की 3 सदस्य टीम ने डाक में शामिल होने वाले कंपनियों द्वारा प्रस्तुत किए गए जहाजों एवं उससे संबंधित कागजातों का भौतिक सत्यापन किया था। जांच के बाद टीम ने महालक्ष्मी इंजीको इनजीकोन प्राइवेट लिमिटेड यह कहते हुए अयोग्य करार दिया की उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए जलयानो के कागजातों के परिचालन की अनुमति केवल बंगाल में है। झारखंड और बिहार में परिचालन के लिए उन जवानों का अनुमति पत्र आवेदन में संलग्न नहीं किया गया है। ऐसे में प्रक्रिया शुरू होने के पहले ही उक्त कंपनी को आयोग करार देते हुए डाक में वक्ता के रूप में शामिल होने नहीं दिया गया। डाक प्रक्रिया में केबल इनफिनिटी इंटरप्राइजेज साहिबगंज तथा नाव यातायात सहयोग समिति साहेबगंज भाग ले सका। इसमें इनफिनिटी इंटरप्राइजेज साहिबगंज सुरक्षित जमा राशि 24 लाख 33 हजार 400 रुपए को बढ़ाते हुए इनफिनिटी इंटरप्राइजेज ने पहली बोली लगाते हुए 24.51 लाख रुपए लगाया। ऐसे में निविदा की शर्तों के अनुसार समिति को प्राथमिकता देते हुए फेरी घाट की बंदोबस्ती 24.51 लाख रुपए में तय कर दी गई। बता दें कि यह बंदोबस्ती मार्च माह में ही की जानी थी, लेकिन 20 मार्च को होने वाली बंदोबस्ती प्रक्रिया को 19 मार्च की रात को राजस्व का रिव्यू करने का हवाला देते हुए संथाल परगना कमिश्नर ने रद्द कर दिया था। बाद में फिर से बदमस्ती की प्रक्रिया शुरू की गई। 2 दिसंबर को यह प्रक्रिया पूर्ण की जानी थी। इसके लिए चार कंपनियों ने आवेदन किया था। एसडीओ की अगुवाई वाली 3 सदस्य जांच टीम नेजांच के बाद तीन कंपनियों को डाक में शामिल होने के लिए अयोग्य करार किया था।तकनीकी रूप से केवल नाव यातायात सहयोग समिति साहिबगंज सही पाया गया था। केवल एक कंपनी बचे रहने के कारण डाक की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए इसे 8 दिसंबर तय किया गया था। बता देगी 8 माह से फेरी सेवा की बंदोबस्ती नहीं होने से लोगों को झारखंड से बिहार और बिहार से झारखंड आवागमन करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। जान जोखिम में डालकर लोग नाव से आवागमन करने को विवश थे। ऐसे में फेरी घाट की बंदोबस्ती तय होने के बाद जल मार्ग से आवागमन करने वाले लोगों राहत की सांस मिली है।

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