मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पश्चिम बंगाल के कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, अब तक कुल संदर्भित मामलों में से लगभग 53 प्रतिशत मामलों का निपटारा किया जा चुका है। इन 32 लाख मामलों में से करीब 40 प्रतिशत, यानी लगभग 12 लाख 80 हजार मतदाताओं को हटाने योग्य पाया गया है।
हालांकि, जिन मतदाताओं को हटाने योग्य माना गया है, उन्हें राहत का अवसर देते हुए राज्य में गठित 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों में अपील करने का अधिकार दिया गया है। वर्तमान में इस पूरी प्रक्रिया को 700 से अधिक न्यायिक अधिकारी अंजाम दे रहे हैं, जिनमें पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड से आए 100-100 अधिकारी भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को जारी अंतिम मतदाता सूची में, न्यायिक जांच के लिए भेजे गए 60 लाख मामलों को छोड़कर, पहले ही 63 लाख 66 हजार 952 नाम हटाए जा चुके थे। इसके बाद न्यायिक जांच के दौरान 12 लाख 80 हजार और नाम हटाने योग्य पाए जाने से कुल हटाए गए मतदाताओं की संख्या बढ़कर लगभग 77 लाख हो गई है।
एसआईआर की अधिसूचना जारी होने से पहले, नवंबर में पश्चिम बंगाल में कुल मतदाताओं की संख्या सात करोड़ 66 लाख 37 हजार 529 थी। दिसंबर में प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में 58 लाख 20 हजार 899 नाम हटाए गए थे, जिसे फरवरी में जारी अंतिम सूची में बढ़ाकर 63 लाख 66 हजार 952 कर दिया गया।
इस बीच, उत्तर बंगाल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग इस अभ्यास के जरिए राज्य के लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान कर रहा है और विशेष रूप से आदिवासी तथा पिछड़े वर्गों को निशाना बनाया जा रहा है।
चुनाव 26: बंगाल में एसआईआर के 32 लाख मामलों में न्यायिक प्रक्रिया पूरी, 40 प्रतिशत को हटाने योग्य पाया गया
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” श्रेणी में चिन्हित 60 लाख मामलों में से 32 लाख मामलों की न्यायिक जांच प्रक्रिया बुधवार रात तक पूरी कर ली गई है। यह जानकारी निर्वाचन आयोग की ओर से दी गई है।












