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चुनाव 26: बहरामपुर से कांग्रेस प्रत्याशी अधीर रंजन चौधरी ने किया नामांकन, उन पर 25 लाख का कर्ज़


कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए बहरामपुर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी अधीर रंजन चौधरी ने गुरुवार को नामांकन दाखिल किया। इसके साथ ही उनके चुनावी हलफनामे में उनकी संपत्ति, देनदारियां और लंबित मामलों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।

हलफनामे के अनुसार, अधीर रंजन चौधरी के पास 94,500 रुपये नकद हैं, जबकि उनकी पत्नी अतसी चौधरी के पास 7.25 लाख नकद हैं। अधीर के चार बैंक खातों में कुल 6 लाख 42 हजार 611 रुपये जमा हैं। इसके अलावा उनके पास 8 लाख 15 हजार 705 रुपये का म्यूचुअल फंड निवेश, 3 लाख रुपये की जीवन बीमा पॉलिसी, 22.27 लाख की एक कार और 27.60 लाख के सोने के आभूषण हैं। इस प्रकार उनकी कुल चल संपत्ति 48 लाख 40 हजार 602 रुपये बताई गई है।

वहीं उनकी पत्नी अतसी चौधरी की चल संपत्ति एक करोड़ 27 लाख 89 हजार 934 रुपये बताई गई है। इसमें दो बैंक खातों की जमा राशि, म्यूचुअल फंड, जीवन बीमा पॉलिसी, 2 लाख 79 हजार रुपये की एक कार और लगभग एक करोड़ 74 हजार रुपये के आभूषण शामिल हैं।

हलफनामे में यह भी बताया गया है कि उनके आश्रित संतान के पास 27 लाख 92 हजार 329 रुपये की चल संपत्ति है।

अधीर रंजन चौधरी की अचल संपत्ति, जिसमें जमीन, मकान और फ्लैट शामिल हैं, की कुल कीमत 6 करोड़ 73 लाख 15 हजार 500 रुपये बताई गई है। वहीं उनकी पत्नी की अचल संपत्ति 4 करोड़ 32 लाख 28 हजार 500 रुपये की है।

देनदारियों की बात करें तो उनकी पत्नी पर 7 लाख 91 हजार रुपये का बैंक ऋण सहित कुल 24 लाख 62 हजार रुपये की देनदारी दर्ज है।

हलफनामे में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से दो मुर्शिदाबाद और एक मालदा जिले में है। हालांकि इनमें से किसी भी मामले में अभी आरोप तय नहीं हुए हैं।

शैक्षणिक योग्यता के बारे में हलफनामे में बताया गया है कि अधीर रंजन चौधरी ने नौवीं कक्षा तक पढ़ाई की है, हालांकि वह लंबे समय से संसद में हिंदी और अंग्रेजी में प्रभावी भाषण देने के लिए जाने जाते रहे हैं।

राजनीतिक करियर की बात करें तो उन्होंने 1991 में मुर्शिदाबाद के नवग्राम से पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 1996 में उसी सीट से जीतकर वह पहली बार विधायक बने। इसके बाद वह बहरामपुर से लगातार पांच बार लोकसभा सदस्य रहे और केंद्र सरकार में रेल राज्य मंत्री, लोकसभा में कांग्रेस के नेता तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जैसे पदों पर भी रहे।

2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार यूसुफ पठान से हार का सामना करना पड़ा था। करीब दो साल बाद वह फिर से विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरे हैं।

हलफनामे के अनुसार उनका पेशा राजनीतिज्ञ और समाजसेवी है तथा उनकी आय का मुख्य स्रोत सांसद के रूप में मिलने वाला वेतन और भत्ता रहा है। उनकी पत्नी एक अंतरराष्ट्रीय संस्था के विशेष कार्यक्रम में सलाहकार के रूप में कार्यरत बताई गई हैं।

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