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कोलकाता आरजी कर वित्तीय अनियमितता मामला: ईडी ने पहली चार्जशीट दाखिल की


कोलकाता। कोलकाता स्थित आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में करोड़ों रुपए की वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी चार्जशीट दाखिल की है।

अपनी चार्जशीट में ईडी ने दो निजी विक्रेताओं, बिप्लब सिन्हा और सुमन हाजरा, को भी मामले में आरोपी लाभार्थी के रूप में नामित किया है। आरजी कर को दवाएं और चिकित्सा उपकरण सप्लाई करने वाली एजेंसी हाजरा मेडिकल को भी ईडी की चार्जशीट में नामित किया गया है। ईडी के अलावा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) भी आरजी कर वित्तीय अनियमितता मामले में जांच कर रही थी।

 सीबीआई ने बलात्कार और हत्या के मामले के पीछे 'बड़ी साजिश' की भी जांच की। सीबीआई ने पहले ही वित्तीय अनियमितता मामले में अपनी चार्जशीट दायर कर दी थी। शुक्रवार को ईडी ने अपनी पहली चार्जशीट दायर की। सीबीआई की तरह ईडी ने भी आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को वित्तीय अनियमितताओं में मुख्य आरोपी बनाया है।

 आरजी कर में वित्तीय अनियमितता मामले में मुख्य आरोपों में टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर, राज्य लोक निर्माण विभाग को दरकिनार करते हुए निजी एजेंसियों को इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्ट्रैक्ट देना और पोस्टमार्टम के लिए लाए गए अज्ञात शवों से कथित तौर पर अंग बेचना शामिल है। 

 पहले दायर सीबीआई चार्जशीट में केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों ने आरोपी, विशेष रूप से संदीप घोष की संपत्ति में आरजी कर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद महत्वपूर्ण और तेजी से वृद्धि पर प्रकाश डाला था। सीबीआई ने उन्हें कथित घोटाले के पीछे मास्टरमाइंड के रूप में भी माना। अपनी चार्जशीट में सीबीआई ने बताया कि संदीप घोष ने कथित तौर पर आरजी कर मुर्दाघर में पोस्टमार्टम के लिए आने वाले अज्ञात शवों से अंग बेचकर कैसे वित्तीय लाभ कमाया। जांचकर्ताओं ने पाया कि 2021 से प्रति वित्तीय वर्ष औसतन 60 शवों का कोई हिसाब नहीं था। पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग (डब्ल्यूबीएचआरसी) ने भी इस अपराध को सबसे अजीब अपराधों में से एक बताया।


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