घटना पिछले महीने मगराहाट की है, जहां विशेष रोल पर्यवेक्षक सी मुरुगन सुनवाई सत्रों की समीक्षा के लिए पहुंचे थे। आरोप है कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उनके वाहन पर हमला किया और उन्हें व्यक्तिगत रूप से घेरा। उस समय राज्य पुलिस पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम न करने के आरोप भी लगे थे, जबकि दौरे की जानकारी पहले से जिला पुलिस को दी गई थी।
घटना के बाद सी मुरुगन ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय को भेजी थी। इसके बाद तीन जनवरी को चुनाव आयोग ने डीजीपी से कार्रवाई रिपोर्ट तलब की थी। आयोग ने चेतावनी दी थी कि भविष्य में मतदाता सूची पर्यवेक्षकों की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
नवंबर से राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू होने के बाद कई जगहों पर चुनाव अधिकारियों के साथ बदसलूकी की घटनाएं सामने आई हैं। ज्यादातर मामलों में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर आरोप लगे हैं।इधर कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल के कार्यालय के बाहर भी विरोध प्रदर्शन हुए थे।
इन हालात को देखते हुए पिछले महीने केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी की सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया। उनकी सुरक्षा श्रेणी वाई श्रेणी कर दी गई है और अब उन्हें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की सुरक्षा मिल रही है। साथ ही उनके कार्यालय में भी केंद्रीय बल की तैनाती की गई है।
चुनाव पर्यवेक्षक पर भीड़ के हमले की रिपोर्ट देने की डीजीपी की समयसीमा आज खत्म
कोलकाता। पश्चिम बंगाल पुलिस के डीजीपी राजीव कुमार के लिए चुनाव आयोग को कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा आज मंगलवार शाम पांच बजे समाप्त हो रही है। यह रिपोर्ट दक्षिण 24 परगना जिले में चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त विशेष पर्यवेक्षक पर हुए हमले और बदसलूकी के मामले से जुड़ी है।












