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बाइक के लिए घर छोड़ा, राख के ढेर में मिला वजूद


मेदिनीपुर। कोलकाता के आनंदपुर स्थित गोदाम में लगी भीषण अग्नि की ज्वाला ने पूर्व मेदिनीपुर के तमलुक निवासी एक मेधावी छात्र के सपनों को राख की ढेरी में बदल दिया है। तमलुक के शालिका गढ़चक का रहने वाला 18 वर्षीय देवादित्य डिंडा, जो कक्षा ग्यारहवीं का छात्र था, अपने पिता से मोटरचालित दुपहिया वाहन (बाइक) दिलाने की जिद कर बैठा था। पिता शंकर डिंडा, जो एक वस्त्रालय में साधारण कर्मचारी हैं, ने अपनी आर्थिक विवशता व्यक्त करते हुए कहा था कि उनके पास अभी इतने धन का प्रबंध नहीं है। पिता की इसी असमर्थता से क्षुब्ध होकर देवादित्य अपने स्वाभिमान की रक्षा और स्वयं के परिश्रम से वाहन खरीदने का संकल्प लेकर चुपचाप घर से निकल गया था। वह अपने से आयु में बड़े एक मित्र के साथ आनंदपुर पहुंचा और वहां एक सज्जा सामग्री (डेकोरेटर) के गोदाम में पुष्प सज्जा का कार्य संभाल लिया।

इस घटना से मात्र कुछ घंटे पहले रविवार रात देवादित्य ने अपनी मां शर्मिष्ठा देवी से फोन पर बात कर आश्वस्त किया था कि वह कुछ ही दिनों में कार्य पूरा कर घर लौटेगा और अपनी उच्च माध्यमिक परीक्षा में शामिल होगा। उसकी मां ने बताया कि बेटे की बातों से उन्हें संतोष हुआ था कि वह सुरक्षित है और शीघ्र वापस आएगा।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, रविवार देर रात लगभग डेढ़ बजे देवादित्य ने सामाजिक माध्यम (सोशल मीडिया) पर अपनी एक सेल्फी भी साझा की थी। उसके मात्र दो घंटे के भीतर गोदाम में अग्निकांड हुई, जिसने वहां उपस्थित अनेक श्रमिकों के साथ देवादित्य को भी अपनी चपेट में ले लिया।

फिलहाल देवादित्य के घर में शोक का वातावरण है। पिता शंकर डिंडा अपनी सुबकियों के बीच स्वयं को कोस रहे हैं कि उन्होंने बेटी के विवाह लिए धन संचय करने के उद्देश्य से पुत्र की मांग को अनदेखी किया था। उनका हृदय अब इस संशय से व्याकुल है कि क्या वे अपने पुत्र का अंतिम दर्शन भी कर पाएंगे। अब प्रशासन द्वारा देह की पहचान हेतु आनुवंशिक परीक्षण (डीएनए टेस्ट) का ही सहारा लिया जा रहा है।

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