लखनऊ विश्वविद्यालय में हनुमान चालीसा का पाठ करने पर एबीवीपी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया
नई दिल्ली। लखनऊ विश्वविद्यालय में मंगलवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों ने विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर परिसर के अंदर स्थित ऐतिहासिक लाल बारादरी में हनुमान चालीसा का पाठ करने का प्रयास किया।
परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ होने की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा और कई छात्रों को हिरासत में लेकर परिसर को खाली कराया। छात्रों की गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही अन्य छात्र आ गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
छात्रों का आरोप है कि लाल बारादरी में नमाज अदा करने की अनुमति तो दे दी गई थी, जबकि हिंदू छात्रों को उसी स्थान पर हनुमान चालीसा पढ़ने की अनुमति नहीं दी गई थी।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "यहां नमाज अदा करने की अनुमति तो दी जाती है, लेकिन हनुमान चालीसा पढ़ने की अनुमति नहीं दी जाती है।"
विरोध प्रदर्शन को देखते हुए विश्वविद्यालय में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके साथ ही पीएसी की तीन कंपनियां और दो स्थानीय पुलिस स्टेशनों के कर्मियों को विश्वविद्यालय के प्रवेश गेट पर तैनात किया गया है।
बजरंग दल के सदस्यों ने दावा किया कि वे लाल बारादरी में हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए एकत्रित हुए थे।
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कहा कि हम आज लाल बारादरी में हनुमान चालीसा का पाठ करने आए हैं। कल तक यह एक जर्जर इमारत थी। अचानक यह मस्जिद कैसे बन गई? कुछ छात्र समूहों ने वहां नमाज अदा की और कुछ लोगों ने उनका समर्थन किया। उन पर हमला कौन कर रहा था?
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, "पूरा मामला जांच के अधीन है। हम हर चीज का ध्यान रखेंगे और हर हाल में कानून व्यवस्था बनाए रखेंगे। पुलिस मामले की जांच कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।"
इससे पहले सोमवार को समाजवादी छात्र सभा (एससीएस), नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) से संबद्ध छात्रों ने लाल बारादरी के बाहर रात भर धरना प्रदर्शन किया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जानबूझकर ऐतिहासिक इमारत के अंदर स्थित एक मस्जिद को सील कर दिया था ताकि मुस्लिम छात्रों को रमजान के पवित्र महीने के दौरान नमाज अदा करने से रोका जा सके।











