स्थानीय लोगों का कहना है कि झील बनने के बाद जल क्रीड़ा, नौकायन, पर्यटन और अन्य गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा सकता था, लेकिन शासन-प्रशासन और टीएचडीसी द्वारा आज तक कोई ठोस कार्ययोजना सामने नहीं लाई गई। इससे वे ग्रामीण स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, जिन्होंने अपनी पुश्तैनी भूमि बाँध प्रशासन को इस उम्मीद के साथ दी थी कि बिजली उत्पादन के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को भी रोजगार मिलेगा।
नागणी, चिन्याली सौड़, धनपुर, चुपल्या, श्यामपुर सहित आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि न तो झील क्षेत्र के चारों ओर रिंग रोड का निर्माण किया गया और न ही सुरक्षा के कोई पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। इसके साथ ही युवाओं के लिए कोई रोजगारपरक योजना भी अब तक लागू नहीं की गई।
इधर जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि प्रशासन में इच्छाशक्ति हो तो झील क्षेत्र में वॉटर स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट, नौकायन, साहसिक पर्यटन एवं अन्य स्वरोजगार योजनाओं को आसानी से शुरू किया जा सकता है। इससे न केवल क्षेत्र का विकास होगा बल्कि स्थानीय युवाओं को भी पलायन से राहत मिलेगी।
स्थानीय नागरिकों ने शासन-प्रशासन और टीएचडीसी से मांग की है कि टिहरी झील क्षेत्र के समग्र विकास हेतु शीघ्र ठोस योजना बनाई जाए, ताकि क्षेत्र की प्राकृतिक सम्पदा का सदुपयोग हो सके और प्रभावित परिवारों को उनका हक मिल सके।
टिहरी झील में रोजगार की अपार सम्भावनाएं, फिर भी स्थानीय युवाओं में निराशा
उत्तरकाशी। टिहरी बांध की सबसे बड़ी झील, जो टिहरी से चिन्याली सौड़ तक लगभग 42 किलोमीटर के दायरे में फैली है, इन दिनों जल स्तर कम होने के कारण भागीरथी नदी का पानी अविरल बहता हुआ दिखाई दे रहा है। जब बांध प्रशासन द्वारा जल रोका जाता है, तब यहाँ झील का जल स्तर आर.एल. 830 तक पहुंच जाता है, जिससे इस क्षेत्र में पर्यटन एवं रोजगार की अपार सम्भावनाएं बनती हैं।












