शुक्रवार को जिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रदीप रावत के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता ने नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे जहां कलेक्टर के प्रतिनिधि उपजिलाधिकारी डुंडा देवेन्द्र शर्मा को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रेषित छह सूत्री ज्ञापन में कहा गया कि केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि गरीब, मजदूर और किसान के आत्मसम्मान का अधिकार है। उन्होंने मांग की कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के मूल प्रावधानों को बरकरार रखा जाए। कांग्रेस पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार नाम बदलने और बजट कम करने के बहाने पंचायतों की शक्ति छीनना चाहती है। कहा कि यह योजना उनके जैसे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन है और इसमें किसी भी तरह की कटौती उन्हें बेरोजगार कर देगी।
ज्ञापन में कहा गया कि न्यूनतम मजदूरी 400 प्रतिदिन निर्धारित की जाए तथा भुगतान अधिकतम 15 दिनों के भीतर किया जाय। वहीं तकनीकी जटिलताओं के नाम पर श्रमिकों के जॉब कार्ड या कार्य मांग को निरस्त न करने की मांग की गई है।
इस दौरान इस मौके पर पूर्व जिलाध्यक्ष मनीष राणा, शीशपाल पोखरियाल, विक्रम सिंह रावत, कमल सिंह रावत, संदीप नौटियाल, सुधीश पंवार, विश्वास रावत, मनोज पंवार, उत्तम सिंह गुसाईं, एकादशी, राखी राना, मनोज मिनान, प्रदीप भट्ट, आदि मौजूद रहे है।
बता दें इससे पूर्व जिला कांग्रेस कमेटी उत्तरकाशी के नेतृत्व में मनरेगा बचाओ संग्राम के अंतर्गत ग्राम सिरी के ढुंग कस्बे में एक जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, मनरेगा श्रमिकों, आदि मौजूद रहे।
कांग्रेस की मनरेगा बचाने की मुहिम, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
उत्तरकाशी। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के प्रावधानों को यथावत रखने और इस कानून को मजबूती प्रदान करने की मांग को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने प्रदर्शन कर उप जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा।












