भराड़ीसैंण। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान अवैध खनन का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष कांग्रेस ने सदन से सांकेतिक बहिगर्मन किया। सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से खनन से राज्य को उल्लेखनीय राजस्व प्राप्त हुआ है।
कांग्रेस विधायक विरेन्द्र कुमार के प्रश्न के उत्तर में सरकार की ओर से बताया गया कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में नदियों, उपनदियों और अन्य खनन क्षेत्रों में खनन का कार्य निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार संचालित किया जा रहा है। विभाग के अनुसार खनन के कारण सड़कों, पुलों, तटबंधों, कृषि भूमि और पर्यावरण संतुलन को गंभीर क्षति पहुंचने का कोई मामला संज्ञान में नहीं आया है।
सरकार ने बताया कि राज्य में अब तक 208 खनन पट्टे स्वीकृत किए गए हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल 4366.376 हेक्टेयर है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में खनन से राज्य को उल्लेखनीय राजस्व प्राप्त हुआ है। वर्षवार देखें ताे 2022-23 में 472.32 करोड़, 2023-24 में 645.46 करोड़ तथा 2024-25 में 1040.57 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
सरकार के अनुसार अवैध खनन, ओवरलोडिंग और अवैध परिवहन के मामलों में लगातार कार्रवाई की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2252 मामलों में कार्रवाई करते हुए 82.12 करोड़ रुपये की वसूली की गई। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनवरी 2026 तक 1553 मामलों में कार्रवाई कर 39.08 करोड़ रुपये की वसूली की गई है।
इस दौरान प्रीतम सिंह ने प्रश्न उठाते हुए कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री और विधायक अरविंद पांडेय पहले भी अवैध खनन का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार ने इस मामले की जांच कराई और उसका क्या परिणाम सामने आया।इस पर संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि सरकार अवैध खनन को लेकर सख्त है और खनन नीति के बेहतर क्रियान्वयन के लिए राज्य को पुरस्कार भी मिला है। उन्होंने बताया कि चार जनपदों में निविदा के आधार पर खनन का ठेका दिया गया है।इस बीच नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भी इस मुद्दे को उठाया। सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्षी सदस्यों ने कुछ समय के लिए सदन से वॉकआउट किया, हालांकि बाद में वे वापस सदन में लौट आए।
अवैध खनन पर सदन में हंगामा, सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने किया बहिगर्मन












