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राजकॉप पुलिस एप से अपराधियों की पहचान हुई आसान


धौलपुर। राजस्थान पुलिस के लिए मोबाइल में काम करने वाला राजकॉप एप बहुत मददगार साबित हो रहा है। इस एप से पुलिस संदिग्ध व्यक्तियों, असामाजिक तत्वों व क्रिमिनल्स को आसानी से ट्रैक कर पा रही है। इसके साथ ही गुमशुदा व लावारिस लोगों को फोटो से मिलान कर उनके परिवार तक पहुंचाया रहा है। पुलिस द्वारा नाकाबंदी तथा गष्त के दौरान बेहतर उपयोग किया जा रहा है।

जिला पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने बताया कि राजकॉप एप से अपराधी की फोटो खींचने के साथ ही पूरी जानकारी आ जाती है। जिसमें अपराधी के खिलाफ कितने मामले दर्ज हैं, कितनी बार जेल गया, कितने मामलों में सजा हुई है और किस तरह का क्रिमिनल है, राजस्थान के अलावा किस-किस राज्य में क्राइम किया? यह सब डिटेल्स एक क्लिक पर उनके सामने खुलकर आ जाती है। जिले में पुलिस अधिकारियों को राजकॉप के बेहतर इस्तेमाल के लिए निर्देश दिए गए हैं। जिले में हाईवे सहित अन्य दुर्गम इलाकों में नाकाबंदी, गश्त एवं अन्य पुलिस गतिविधियों में इस एप का बेहतर उपयोग किया जा रहा है।

जिले भर में की जा रही ''ए'' श्रेणी की नाकाबंदी के दौरान बाड़ी कस्बे में थानाधिकारी देवेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में पुलिस नाकाबंदी कर वाहनों एवं चालकों की सघन चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान एक वाहन चालक का थानाधिकारी द्वारा राजकॉप एप पर फोटो मिलान किया गया तो उस व्यक्ति की पहचान सचिन शर्मा निवासी आंगई जिला धौलपुर के रूप में हुई। इसके साथ ही पूर्व में अवैध हथियार के मामले में जयपुर के सिंधी कैम्प थाना में सचिन के विरुद्ध प्रकरण दर्ज होने व गिरफ्तार होने का रिकार्ड भी ट्रेक हुआ, जिसकी तस्दीक मौके पर सचिन द्वारा भी की गई।

पुलिस अधीक्षक सांगवान ने बताया कि राजकॉप एप विशेषकर पुलिस कर्मियों के लिए अधिकृत ''RajCop'' और नागरिकों के लिए ''RajCop Citizen'' के फोटो मिलान फीचर की मदद से संदिग्ध व्यक्तियों और अपराधियों की तुरंत पहचान की जा सकती है। गश्त या नाकाबंदी के दौरान, पुलिसकर्मी किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की फोटो खींचकर ऐप के माध्यम से डेटाबेस से मिलान कर सकते हैं। फोटो का मिलान होते ही, यदि वह अपराधी पहले कभी पकड़ा गया है, तो उसके खिलाफ दर्ज मामले, जेल जाने का रिकॉर्ड और सजा का विवरण सामने आ जाता है। यह ऐप फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाली) तकनीक का उपयोग करता है, जिससे हुलिया बदलने पर भी अपराधी को पकड़ने में मदद मिलती है। यह सिस्टम CCTNS (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स) के माध्यम से देश भर के पुलिस डेटाबेस से जुड़ा हुआ है। लावारिस लोगों की पहचान के अलावा, यह ऐप गुमशुदा व्यक्तियों या लावारिस शवों की फोटो से मिलान कर उनकी शिनाख्त करने में भी बहुत मददगार है। पुलिस अधीक्षक ने बताया है कि इन्ही विशेषताओं के कारण यह तकनीकी नवाचार राजस्थान पुलिस को अपराधियों को ट्रैक करने और अपराध रोकने में काफी मददगार साबित हो रहा है।

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