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विदेश यात्रा संवैधानिक हक, आपराधिक मामला लंबित होने से पासपोर्ट नवीनीकरण से नहीं किया जा सकता इनकार


जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने विदेश यात्रा को हर भारतीय का संवैधानिक अधिकार मानते हुए कहा कि आपराधिक मामला लंबित होने के कारण विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट जारी करने या नवीनीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता। आपराधिक मामला लंबित होना पासपोर्ट सुविधा से इनकार करने का आधार नहीं हो सकता। पासपोर्ट जारी करने से इनकार करना केवल वैयक्तिक स्वतंत्रता का ही मामला नहीं है, बल्कि विदेश यात्रा पर जाने के अधिकार की संवैधानिक गारंटी का भी उल्लंघन है।

न्यायाधीश अनूप कुमार ढंड ने यह आदेश त्रिविक्रम सिंह राठौड की याचिका को निस्तारित करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट ऐसा दस्तावेज है, जिसके माध्यम से ही कोई व्यक्ति दूसरे देश की सीमा में प्रवेश कर सकता है। अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार बिना पासपोर्ट किसी दूसरे देश की सीमा में प्रवेश नहीं किया जा सकता। पासपोर्ट अधिनियम में हर भारतीय को विदेश यात्रा का अधिकार है, उसे पासपोर्ट जारी करने से इनकार नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ता ने पासपोर्ट की समयसीमा समाप्त होने के कारण उसके नवीनीकरण के लिए आवेदन किया, लेकिन जयपुर के एक महिला थाने में मामला दर्ज होने के कारण पुलिस की निगेटिव रिपोर्ट दी और उसके आधार पर पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने इस मामले में पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं करने के 5 जनवरी 23 के आदेश को रद्द कर दिया, वहीं नवीनीकरण पर नए सिरे से विचार करने को कहा। इसके साथ ही याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह कोर्ट की अनुमति बिना विदेश यात्रा पर न जाए और विदेश जाने पर ट्रायल का सामना करने के लिए लौटकर आए।

कोर्ट ने कहा कि दोषी साबित हुए बिना हर व्यक्ति निर्दोष है। परिवार में महिला को प्रताड़ित करने व विश्वासघात के अपराध का मामला लंबित होने के आधार पर पासपोर्ट का नवीनीकरण करने से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट विदेश जाने के अधिकार व अपराधी के खिलाफ मुकदमा चलाने के अधिकार में संतुलन बनाए रखने को बाध्य है।
उमरिया । मध्य प्रदेश के उमरिया जिले स्थित साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के जोहिला क्षेत्र की नौरोजाबाद कोल माइंस एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते चर्चा में है। इस बार मामला कोयले में मिट्टी (मुरूम) मिलाकर वजन बढ़ाने और कथित तौर पर करोड़ों रुपये के घोटाले से जुड़ा बताया जा रहा है।

पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष दिलीप पांडे ने इस पूरे मामले की शिकायत केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री को भेजते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि खदान में जेसीबी मशीनों के जरिए खुलेआम कोयले में मिट्टी मिलाई जा रही है और इस मिलावटी कोयले को बिना गुणवत्ता परीक्षण के रेलवे रैक के माध्यम से विभिन्न राज्यों में भेजा जा रहा है।

सप्लाई चेन और राजस्व पर असर की आशंका

यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो इससे न सिर्फ सरकारी राजस्व को नुकसान हो सकता है बल्कि देशभर में कोयले की सप्लाई चेन की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि मिलावटी कोयला उद्योगों तक पहुंच रहा है, जिससे मशीनों को नुकसान, उत्पादन में गिरावट और आर्थिक हानि जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

दिलीप पांडे ने अपने पत्र में आशंका जताई है कि यह कार्य किसी एक व्यक्ति का नहीं हो सकता, बल्कि इसमें कई अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है। विशेष रूप से साइड इंचार्ज और सेल्स मैनेजर की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं, वहीं बिलासपुर जोन के अधिकारियों की संलिप्तता की भी जांच की मांग की गई है।

वायरल वीडियो ने बढ़ाई चिंता

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो भी इस मामले को और गंभीर बना रहे हैं, जिनमें कथित रूप से कोयले में मिट्टी मिलाने की प्रक्रिया दिखाई दे रही है। हालांकि, इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद इसके, अब तक ठोस कार्रवाई न होने से प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

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