राजस्थान हाईकोर्ट : बैंक अधिकारी की रिट याचिका खारिज, सेवा समाप्ति आदेश को जायज और विधि सम्मत

राजस्थान हाईकोर्ट : बैंक अधिकारी की रिट याचिका खारिज, सेवा समाप्ति आदेश को जायज और विधि सम्मत
जोधपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय की न्यायाधीश डा नूपुर भाटी ने बैंक अधिकारी की रिट याचिका खारिज करते हुए परीवीक्षा काल में अनाधिकृत अवकाश पर बिना विभागीय कार्रवाई किए सेवा समाप्ति आदेश को जायज और विधि सम्मत बताया है।

याची ऋषि कुमार ने रिट याचिका दायर कर कहा कि उसकी नियुक्ति राजस्थान मरूधरा ग्रामीण बैंक अब राजस्थान ग्रामीण बैंक में श्रेणी तीन अधिकारी पद पर हुई थी और वर्ष 2023 में नौकरी से त्यागपत्र का आवेदन किया था लेकिन कुछ दिन अवकाश पर होने से बिना विभागीय कार्रवाई किए बैंक अध्यक्ष ने 6 फरवरी 2025 को उसकी सेवा समाप्त कर दी,जो कि गैर कानूनी होने से आदेश रद्द किया जाएं। राजस्थान ग्रामीण बैंक की ओर से अधिवक्ता अनिल भंडारी ने बहस करते हुए कहा कि बैंक ने सेवा समाप्ति के साथ एक माह का वेतन याची के बैंक खाते में भेजा था,जिसे याची ने स्वैच्छिक रूप से निकाल लिया सो यह अवधारणा ली जानी चाहिए कि उसने अपनी सभी आपत्तियों का त्याग कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस्तीफा सशर्त होने तथा औपचारिकताएं पूर्ण नहीं होने के कारण स्वीकार नहीं किया गया और परीवीक्षा काल में अनाधिकृत रूप से 513 दिन अवकाश पर रहने से सेवा समाप्ति का आदेश दंडात्मक नहीं होकर सरल है।

राजस्थान उच्च न्यायालय की न्यायाधीश डा नूपुर भाटी ने रिट याचिका खारिज करते हुए कहा कि याची को जयपुर पुलिस ने 25 जुलाई 2022 को डम्मी उम्मीदवार के तौर पर परीक्षा देते हुए गिरफ्तार किया था और दिल्ली पुलिस ने डम्मी उम्मीदवार के रूप में परीक्षा देते हुए 11 अगस्त 2024 को याची को गिरफ्तार किया और सवा दो माह तक जेल में रहा। उन्होंने कहा कि 17 जून 2022 को नौकरी करने से लेकर फरवरी 2025 तक 513 दिन अवकाश पर रहने से नियोक्ता उसके कामकाज के मूल्यांकन करने से वंचित रहें। उन्होंने कहा कि याची बैंक में श्रेणी तीन अधिकारी पद पर नियुक्त हुआ और जहां पर आम जन के रुपए जमा रहते है और यह अपेक्षा रहती है कि अधिकारी अनुशासनात्मक और ईमानदारी से कार्य करें और उनकी जनता के प्रति जवाबदेही भी होती है।

उन्होंने कहा कि परीवीक्षा काल में कर्मचारी की कार्यक्षमता, आचरण, कर्तव्य के प्रति उसकी निष्ठा आदि की नियोक्ता द्वारा जांच की जाती है जो कि इस प्रकरण में लंबे अवकाश के कारण संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि मात्र इस्तीफे का आवेदन कर देने से कर्मचारी को यह अधिकार नहीं हो जाता है कि वह अनाधिकृत रूप से अवकाश पर रहें,जबकि उसे इस्तीफा स्वीकार होने तक बैंक में नियमित रूप से सेवा देनी थी। उन्होंने कहा कि बैंक की ओर से ड्यूटी पर आने के लिए याची को कई नोटिस दिए गए। उन्होंने कहा कि विभागीय कार्रवाई की चेतावनी,स्पष्टीकरण या तथ्यात्मक निष्कर्ष से सेवा समाप्ति के सरलीकृत आदेश को दंडात्मक आदेश नहीं माना जा सकता सो बिना विभागीय कार्रवाई के सेवा समाप्ति का आदेश प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन नहीं होकर पूर्णतया जायज और विधि सम्मत है।

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