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मकर संक्रांति पर राजस्थान में रंगारंग आयोजन, जलमहल की पाल पर काइट फेस्टिवल में मुख्यमंत्री ने उड़ाई पतंग


जयपुर। राजस्थान में मकर संक्रांति के अवसर पर बुधवार को विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियां आयोजित की गईं। जयपुर में काइट फेस्टिवल 2026 के दौरान देसी-विदेशी पर्यटकों ने पतंगबाजी का आनंद लिया। जलमहल की पाल पर आयोजित फेस्टिवल में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी के साथ पतंग उड़ाई, जबकि हवामहल विधायक बाल मुकुंदाचार्य चरखी पकड़े नजर आए।

शहर में मकर संक्रांति को लेकर पारंपरिक पतंगबाजी के दंगल भी आयोजित किए गए। मंदिरों में विशेष श्रृंगार कर पतंग थीम पर सजावट की गई। चौड़ा रास्ता स्थित ताड़केश्वर महादेव मंदिर में पतंगों से विशेष सजावट की गई तथा भगवान को तिल के लड्डू और फिणी का भोग अर्पित किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दर्शन के लिए उमड़ी।

प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी उत्सव का उल्लास देखने को मिला। टोंक जिले के आवां कस्बे में मकर संक्रांति पर परंपरागत ‘दड़ा’ खेला गया, जिसमें करीब 80 किलो वजनी फुटबॉल का उपयोग किया जाता है। भीलवाड़ा में कई मंदिरों को अहमदाबाद से मंगाई गई रंग-बिरंगी पतंगों से सजाया गया। यहां शाम को भव्य आरती के बाद प्रसाद स्वरूप पतंगें वितरित की जाएंगी। मकर संक्रांति पर जयपुर में सर्वाधिक पतंगबाजी होती है, हालांकि आर्मी डे परेड की तैयारियों के चलते शहर के लगभग पांच किलोमीटर क्षेत्र में पतंगबाजी पर रोक लगाई गई है। इसके बावजूद पुराने शहर में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी पतंगबाजी के दंगल आयोजित किए गए।

जलमहल की पाल पर काइट फेस्टिवल दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। सुबह रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाई गईं, जबकि शाम को आतिशबाजी का आयोजन प्रस्तावित है। फेस्टिवल में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी शामिल हुए। दान-पुण्य के इस पर्व पर धार्मिक आस्था भी देखने को मिली। जयपुर की गौशालाओं में लोगों ने गायों की सेवा की और हरा चारा व गर्म सामग्री खिलाई। अनाथालयों में भी गर्म कपड़े और आवश्यक सामग्री का दान किया गया।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मकर संक्रांति के अवसर पर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सूर्य देव के उत्तरायण होने का यह पर्व सभी के जीवन में नई ऊर्जा, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि लेकर आए तथा अन्नदाताओं की मेहनत के सम्मान और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है।

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