जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में गुरुवार को छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया।
राज्यपाल ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज विश्व के अपराजेय योद्धा थे, जिन्होंने निरंतर युद्ध लड़ते हुए मुगल सल्तनत को चुनौती दी और अपनी सूझबूझ, साहस तथा गोरिल्ला युद्धनीति से आदिलशाही सल्तनत को कमजोर किया।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे शिवाजी महाराज के जीवन से प्रेरणा लेकर मातृभूमि की सेवा के लिए संकल्पित हों। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज की स्मृति मात्र से ही युवाओं में जोश और देशभक्ति का संचार होता है।
राज्यपाल ने कहा कि इतिहास लेखन में भारतीय दृष्टि को पर्याप्त स्थान नहीं मिला, जिसके कारण हमारे वीर योद्धाओं का गौरवशाली इतिहास नई पीढ़ी तक पूरी सच्चाई से नहीं पहुंच पाया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में शिवाजी जयंती समारोह की शुरुआत इसी उद्देश्य से की गई है, ताकि युवा उनके जीवन से प्रेरणा प्राप्त कर सकें।
बागडे ने शिवाजी महाराज के वंश, जन्मस्थान, पिता शाहजी और माता जीजाबाई के योगदान का विस्तार से उल्लेख किया।
उन्होंने प्रतापगढ़ में अफजल खान वध की घटना को वीरता का प्रतीक बताते हुए कहा कि शिवाजी महाराज ने वाघ-नख से वार कर शत्रु का अंत किया। उन्होंने कोंकण और पुणे क्षेत्र के किलों पर विजय तथा बीजापुर की सेना को परास्त करने की घटनाओं का भी उल्लेख किया।
राज्यपाल ने राजस्थान की शौर्य परंपरा का स्मरण करते हुए बप्पा रावल और शेखावाटी अंचल के वीर सैनिकों का उदाहरण दिया तथा युवाओं से भारत के गौरवशाली इतिहास से जुड़ने का आह्वान किया।
इस अवसर पर कुलगुरु आनंद राव भाले ने शिवाजी महाराज के जीवन, युद्ध कौशल और ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला। विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा ने स्वागत भाषण दिया। समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, प्राध्यापक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।













