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भारत ने चक्रवात प्रभावित मेडागास्कर के लिए भेजी मेडिकल सहायता और राहत सामग्री


नई दिल्ली। भारत ने बुधवार को मेडागास्कर को 12 टन चिकित्सा सहायता और 18 टन आपदा राहत सामग्री भेजी। यह सहायता उष्णकटिबंधीय चक्रवात चक्रवात 'फाइटिया' और 'गेजानी' से हुई तबाही के बाद भेजी गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने यह जानकारी दी।

विदेश मंत्रालय (एमईए) के आधिकारिक प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "भारत मेडागास्कर के लोगों के साथ खड़ा है। इस साल की शुरुआत में चक्रवात 'फाइटिया' और 'गेजानी' से हुई भारी तबाही के बाद भारत ने मानवीय मदद भेजी।" उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा, "भारतीय वायुसेना का सी-17 एयरक्राफ्ट 12 टन चिकित्सा सामग्री और 18 टन आपदा राहत सामग्री लेकर एंटानानारिवो में उतरा। इस सामग्री में जीवनरक्षक दवाएं, सर्जिकल सप्लाई, टेंट, पानी के स्टोरेज टैंक, डिग्निटी किट और खाना शामिल है। इनसे आपदा से प्रभावित लोगों को तुरंत सहायता मिलने की उम्मीद है।

" मेडागास्कर को चक्रवात 'फाइटिया' से भारी नुकसान हुआ था, जिसने 31 जनवरी 2026 को बोएनी क्षेत्र के सोआलाला के पास उत्तर-पश्चिमी तट पर लैंडफॉल किया। इसके कारण कई इलाकों में बाढ़ आ गई। यह चक्रवात 28 जनवरी को मोजाम्बिक चैनल के ऊपर बना और पूर्व की ओर बढ़ते हुए तेज हो गया।

 बाद में यह द्वीप को पार कर 1–2 फरवरी के आसपास हिंद महासागर में निकल गया। इसके तुरंत बाद चक्रवात 'गेजानी' ने फरवरी में मेडागास्कर को फिर प्रभावित किया। यह 2025–26 दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर चक्रवात मौसम का तीसरा नामित तूफान था और उस अवधि में मेडागास्कर को प्रभावित करने वाला सबसे शक्तिशाली तूफान रहा। इसी बीच, भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को यह भी घोषणा की कि भारत ने मोजाम्बिक में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद वहां भी सहायता भेजी है। 

मंत्रालय ने कहा कि भारत मोजाम्बिक के साथ एकजुटता में खड़ा है और देश के मध्य तथा दक्षिणी क्षेत्रों में बाढ़ से प्रभावित समुदायों की मदद के लिए बहुआयामी मानवीय सहायता शुरू की है। भारतीय नौसेना के जहाज के माध्यम से भारत ने 500 मीट्रिक टन चावल तत्काल खाद्य सहायता के रूप में भेजा है। इसके अलावा 10 टन राहत सामग्री (जैसे टेंट, हाइजीन किट और पुनर्वास सहायता सामग्री) तथा 3 टन आवश्यक दवाइयां भी भेजी गई हैं। एमईए ने बताया कि राहत प्रयासों के तहत पहले ही समुद्री मार्ग से 86 मीट्रिक टन जीवनरक्षक दवाइयां भेजी जा चुकी हैं।


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