बिलासपुर
/रायपुर, प्रदेश के शासकीय स्कूलों के भवनों की जर्जर
हालात को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने शासन एवं स्कूल
शिक्षा सचिव से भवनों को ठीक करने के बारे में शपथ पत्र में प्रगति रिपोर्ट
मांगी है। इस संबंध में कोर्ट ने अगली सुनवाई 21 अगस्त तय की है।
स्कूलों
के भवनों की जर्जर हालत की वजह से हाल ही में ऐसी कई घटनाएं हुई है, जिससे
कुछ छात्र घायल हुए हैं और गंभीर घटनाएं होते बची। इन घटनाओं को लेकर हाई
कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है और इसे जनहित याचिका मानते हुए बुधवार को
सुनवाई की। उल्लेखनीय है कि जून माह में कोर्ट ने स्कूलों के भवनों की
जर्जर हालत को लेकर दो सप्ताह में राज्य शासन को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने
कहा था। इसके लिए शासन ने दो सप्ताह का समय मांगा, जिसे हाईकोर्ट ने
स्वीकार कर लिया। मीडिया में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर
को लेकर प्रकाशित खबरों पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका
की तरह सुनवाई शुरू की है। मामले को लेकर पूर्व में हुई सुनवाई में शासन ने
बताया था, कि राज्य सरकार ने पहले ही स्कूल भवनों और मुख्यमंत्री स्कूल
जतन योजना के सुधार के संबंध में कदम उठाए हैं। पूरे राज्य में स्कूलों की
पहचान कर स्कूल प्रबंधन से रिपोर्ट मांगी गई है, और जरूरत के अनुसार मरम्मत
और नवीनीकरण कराने के आदेश जारी किए गए हैं। बिलासपुर जिले की रिपोर्ट के
अनुसार यहां 161 स्कूल ऐसे थे, जहां मरम्मत और उन्नयन किया गया। साथ ही
आवश्यकता के मुताबिक नये कमरों का निर्माण किया गया।
याचिका में
सुनवाई की प्रक्रिया के दौरान ही तिफरा के स्कूल, शासकीय प्राथमिक शाला
देवनगर, शासकीय प्राथमिक शाला लिंगियाडीह, शासकीय प्राथमिक कन्या शाला
बिरकोना, शासकीय प्राथमिक शाला आशाबंद, शासकीय उर्दू प्राथमिक शाला खपरगंज
और शासकीय प्राथमिक शाला आशाबंद के संबंध में भी कुछ समाचार प्रकाशित हुए
थे। इन विद्यालयों के संबंध में उक्त विद्यालयों के प्रधानाध्यापक से
रिपोर्ट मांगी गई थी।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा तथा न्यायमूर्ति
रवींद्र अग्रवाल की खंडपीठ में इसे लेकर बुधवार को देर शाम तक हुई सुनवाई
हुई। प्रदेश में स्कूलों के जर्जर भवनों को लेकर हाईकोर्ट कड़ी टिप्पणी
की। कोर्ट ने कहा कि स्वीकृत फंड का उपयोग स्कूलों की हालत सुधारने में हो
भी रहा है या नहीं?हाई कोर्ट को शासन ने एक शपथ पत्र में जवाब दिया और
बताया कि 21 मार्च 2024 से पहले सरकार ने ऐसे जर्जर और असुरक्षित स्कूलों
की गिनती कराई थी।इसमें इसमें 2 हजार 219 स्कूलों को डिस्मेंटल करना था और
19 हजार स्कूलों की मरम्मत करना था। शासन ने बताया कि इन स्कूलों के लिए
स्कूल जतन योजना और डीएमएफ फंड से राजश्री जुटाई जा रही है।मुख्यमंत्री
शाला जतन योजना में 1 हजार 837 करोड़ सत्र 2022 – 23 में शासकीय स्कूलों के
लिए जारी किए गए हैं। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने जब यह जानकारी दी तो चीफ
जस्टिस ने कहा कि इस राशि का इस्तेमाल क्या किया गया? उन्होंने पूछा कि
वास्तव में स्कूलों की स्थिति सुधर रही है या सब कागजों पर ही है।शासन ने
जवाब दिया कि कलेक्टर अपने डीएमएफ फंड से भी राष्ट्रीय उपलबध करा सकते
हैं।इस पर हाईकोर्ट ने ने कहा कि, एक कलेक्टर कहां- कहां जाएगा? विभाग के
जो प्रमुख हैं, शिक्षा सचिव उन्हें मॉनिटरिंग करना चाहिए कि फंड कहां जा
रहा है।हाईकोर्ट ने शासन एवं स्कूल शिक्षा सचिव से भवनों को ठीक करने के
बारे में शपथ पत्र में प्रगति रिपोर्ट मांगी है।
हाईकोर्ट ने शासन एवं स्कूल शिक्षा सचिव से स्कूल भवनों को ठीक करने को लेकर मांगी प्रगति रिपोर्ट
