दरअसल परासी धान खरीदी केंद्र का एक ताजा मामला इस भ्रष्ट व्यवस्था की पोल खोलता है। किसान राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा ने कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपते हुए बताया कि उनकी पत्नी मधु मिश्रा के नाम से 14 क्विंटल 40 किलो धान का पंजीयन हुआ था। पांच जनवरी को जब उनका बेटा धान लेकर केंद्र पहुंचा तो वहां मौजूद खरीदी केंद्र प्रभारी संतोष शुक्ला, कंप्यूटर ऑपरेटर पटेल और अजय गुप्ता ने धान की बिक्री के एवज में दो हजार रुपये की मांग की। आरोप है कि साफ तौर पर कहा गया कि यदि पैसा नहीं दिया गया तो धान पास नहीं होगी।
मजबूरी में किसान के बेटे को दो हजार रुपये कंप्यूटर ऑपरेटर को देने पड़े। इसके अलावा 438 रुपये लेबर भुगतान के नाम पर भी वसूले गए, जबकि सरकार स्पष्ट निर्देश दे चुकी है कि समर्थन मूल्य पर खरीदी के दौरान किसानों से किसी भी प्रकार की राशि नहीं ली जाएगी। जब किसान पक्ष ने इसका विरोध किया तो उन्हें धमकी दी गई कि धान रिजेक्ट कर दी जाएगी या वापस ले जाने को मजबूर किया जाएगा।
राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत उमरिया कलेक्टर से की है, लेकिन उन्हें कार्रवाई की कोई उम्मीद नहीं है। उनका आरोप है कि पूरा प्रशासन इस अवैध वसूली में शामिल है। यही वजह है कि जिले के अन्य किसान भी चुपचाप पैसे देकर अपनी धान बिकवाने को मजबूर हैं। जो किसान आवाज उठाते हैं, उन्हें धान वापस ले जाने की धमकी दी जाती है।
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में वसूली की शिकायत, किसान परेशान
उमरिया। मप्र के उमरिया जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था किसानों के हित में बनाई गई थी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। धान खरीदी केंद्रों पर किसानों से खुलेआम अवैध वसूली की जा रही है जिसकी लगातार शिकायतें भी हो रही हैं । हालात ऐसे हैं कि शिकायत करने वाले किसानों में ही भय और असंतोष का माहौल बना हुआ है।












