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अनूपपुर: खुले आसमान के नीचे मैदान में लग रहीं प्राथमिक कक्षायें, 20 बच्चों का भविष्य दांव पर


अनूपपुर। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में कागजों में चमकते शिक्षा के दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जिले की पुष्पराजगढ़ विकाशखंड के लखौरा ग्राम पंचायत के बरटोला प्राथमिक स्कूल में शिक्षा आज भी खुले आसमान के नीचे दम तोड़ती नजर आ रही है। जहां मासूम बच्चे किताबें हाथ में लेकर तो स्कूल पहुंचते हैं, लेकिन उनके सिर पर न छत है, न सुरक्षा और न ही बुनियादी सुविधाएं। जबकि यह स्कूल सांसद और विधायक निवास से कुछ ही दूरी पर हैं। वहीं दो वर्ष से विद्यालय शिक्षिका लीलावती के घर पर कक्षाएं लगती हैं।

किताब-शिक्षक हैं सुरक्षा नहीं,दफ्तरों में धूल फांक रही फाइलें

जिले की लखौरा ग्राम पंचायत के बरटोला प्राथमिक स्कूल में शिक्षा यहां पढ़ने वाले 20 मासूम बच्चों के सिर पर आज तक पक्की छत नहीं है। शिक्षा का मंदिर खुले मैदान में सिमटकर रह गया है, जहां किताबें तो हैं, शिक्षक भी हैं, लेकिन सुरक्षा, सुविधा और सम्मान नदारद है। दरअसल, वर्ष 2024 में जर्जर हालत में हो चुके पुराने स्कूल भवन को कलेक्टर के आदेश पर गिरा (डिस्मेंटल) दिया गया था। आदेश के बाद उम्मीद जगी थी कि जल्द ही नया भवन बनेगा, लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बावजूद फाइलें दफ्तरों में ही धूल फांक रही हैं। नतीजा यह है कि बच्चे आज भी खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। बरसात में कभी किसी ग्रामीण के घर तो कभी अस्थायी छप्पर के नीचे कक्षाएं लगाई जाती हैं, जबकि तेज धूप और कड़ाके की ठंड में बच्चों की पढ़ाई सीधे प्रभावित होती है।

ग्रामीणों ने लगाए ये आरोप

विद्यालय परिसर में पीने के पानी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। हैंडपंप मौजूद जरूर है, लेकिन वह भी हवा उगल रहा है। प्यासे बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं की कमी से भी जूझ रहे हैं। इस स्कूल में अध्ययनरत सभी बच्चे आदिवासी समुदाय से हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यही वजह है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

विधायक-सांसद के निवास से कुछ दूरी पर ही हैं स्कूल

सबसे हैरानी की बात यह है कि स्थानीय विधायक फुंदेलाल सिंह का निवास मात्र 4 से 5 किलोमीटर की दूरी पर है और वे कांग्रेस के कद्दावर नेता माने जाते हैं। बावजूद इसके इस मुद्दे पर कोई ठोस पहल नहीं हुई। वहीं शहडोल संभाग की भाजपा सांसद हिमाद्रि सिंह का निवास भी स्कूल से महज 5 से 6 किलोमीटर दूर बताया जाता है, लेकिन उनका भी ध्यान इस ओर नहीं गया।

कलेक्टर हर्षल पंचोली ने कहा कि जानकारी मिली है अधिकारियों को मौंके पर भेज कर जानकारी मांगी गई हैं, पर्याप्त भवन होने के बाद भी ऐसा क्यों हो रहा था इसके लिए जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

जिला समन्वय जिला शिक्षा केंद्र सर्व शिक्षा अभियान अनूपपुर आशुतोष कुशवाहा ने बताया कि बच्चों को ग्राम पंचायत के सामुदायिक भवन में बैठाया गया हैं, इसके पहले स्कूल शिक्षिका लीलावती के घर पर लगती थी, ठंड होने के कारण बच्चे बाहर बैठे हैं। यह सही है कि वर्ष 2024 में जर्जर होने के कारण तोड़ दिया गया था। विद्यालय पहले शिक्षा गारंटी स्कूल में शामिल था जिसका एक भवन बचा है वह भी बच्चों के बैठे लायक नहीं है। वार्षिक कार्य योजना में शामिल किया गया है डीएफएम मद की मंजूरी मिलने पर भवन निर्माण प्रारंभ होगा।

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