आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
सुबह से ही जुगसलाई, बागबेड़ा सहित शहर के विभिन्न इलाकों से हजारों की संख्या में लोग जुबली पार्क गेट पर जुटने लगे। यहां से भजन-कीर्तन और जयघोष के साथ रैली निकाली गई, जो अनुमंडल कार्यालय तक पहुंची। पूरे आयोजन का नेतृत्व स्थानीय समन्वयक सुरेश लाल ने किया, जिनके साथ गोपाल महाराज सहित कई संत और समाजसेवी मौजूद रहे। रैली के बाद धालभूम अनुमंडल पदाधिकारी को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।
इस दौरान गोपाल महाराज ने आंदोलन की आगामी रणनीति साझा करते हुए बताया कि इसे तीन चरणों में चलाया जाएगा। पहले चरण में 27 अप्रैल को देशभर के तहसील और प्रखंड स्तर पर ज्ञापन सौंपे गए हैं।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो दूसरा चरण 27 जुलाई और तीसरा एवं निर्णायक चरण 27 फरवरी 2027 को आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी चिंता जताई कि जहां घरों में पाली जा रही गायें सुरक्षित हैं, वहीं सड़कों पर घूमने वाले गोवंश भोजन और इलाज के अभाव में दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
अभियान के तहत गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध, गोचर भूमि की सुरक्षा और गो-सेवा के लिए एक अलग केंद्रीय मंत्रालय बनाने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
आंदोलन को सफल बनाने के लिए पहले से ही शहर के सभी प्रखंडों में जनसंपर्क अभियान चलाया गया था, जिसके तहत 3000 से अधिक लोगों के हस्ताक्षर जुटाए गए।
कार्यक्रम के दौरान सुरेश लाल ने कहा कि देश के सम्मान और संस्कृति की रक्षा के लिए गो माता का सम्मान जरूरी है।
गो सम्मान के लिए जमशेदपुर में विशाल जन-आंदोलन, ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा देने की उठी मांग
पूर्वी सिंहभूम। शहर में सोमवार को गोवंश संरक्षण और उनके सम्मान को लेकर एक बड़े जन-आंदोलन का आयोजन किया गया। गो सम्मान आह्वान अभियान के तहत संत समाज और गो-सेवकों ने एकजुट होकर गो माता को ‘राष्ट्र माता’, ‘राष्ट्रदेव’ और देश की आधारशिला के रूप में संवैधानिक मान्यता देने की मांग उठाई।












