नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उन गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के खिलाफ स्वतः संज्ञान लिया है जो आयोग के नाम, लोगो और पदनामों का दुरुपयोग करके जनता को भ्रमित कर रहे हैं। इस मामले को लेकर आयोग ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सख्त कार्रवाई तथा दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
आयोग ने गुरुवार को बताया कि कई एनजीओ खुद को राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद जैसे नामों से पंजीकृत करवा रहे हैं, जो सुनने में आधिकारिक वैधानिक निकाय जैसा लगता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि ये संगठन अध्यक्ष जैसे पदनामों का उपयोग कर जनता में भ्रम पैदा कर रहे हैं। इन भ्रामक नामों के कारण लोग इन्हें आयोग का हिस्सा या उससे मान्यता प्राप्त समझ लेते हैं। इससे न केवल जनता का विश्वास कम हो रहा है बल्कि धन के गबन और जनादेश के दुरुपयोग की भी आशंका है।
आयोग के अनुसार हाल ही में एक मामला सामने आया है जहां "राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद" नाम का एक एनजीओ दिल्ली में पंजीकृत पाया गया जबकि वह कर्नाटक में सक्रिय है। इसके प्रचार सामग्री में नीति आयोग और विभिन्न मंत्रालयों से संबद्ध होने के बड़े-बड़े दावे किए गए हैं। इस मामले को लेकर कर्नाटक के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने दिल्ली के मुख्य सचिव और पुलिस आयुक्त को इस एनजीओ के पंजीकरण और गतिविधियों की जांच कर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
इन मामलों के मद्देनजर आयोग ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और डीजीपी को नोटिस जारी करके निर्देश दिया है कि आयोग के नाम या लोगो का दुरुपयोग करने वाले व्यक्तियों और संगठनों की तत्काल पहचान की जाए। नियमों का उल्लंघन कर प्राप्त किए गए ऐसे पंजीकरण को तुरंत रद्द किया जाए। दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और पंजीकरण अधिकारियों को भविष्य के लिए सतर्क किया जाए।
नाम, लोगो का दुरुपयोग करने वाले एनजीओ पर सख्ती, मानवाधिकार आयोग का राज्यों को नोटिस












