दिल्ली पुलिस ने दो नाबालिग लड़कों को सकुशल परिवार को सौंपा
नई दिल्ली,। दिल्ली पुलिस की एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और क्राइम ब्रांच ने दो अलग-अलग मामलों में दो नाबालिग लड़कों को सकुशल परिवार को सौंप दिया है। यह कार्रवाई मुखर्जी नगर और वजीराबाद इलाकों से जुड़ी है।
पुलिस के मुताबिक, पहला मामला 12 साल के एक मानसिक रूप से कमजोर लड़के का है। 6 सितंबर 2025 को दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके से यह बच्चा लापता हो गया था। इसके बाद मुखर्जी नगर थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 137(2) के तहत मामला दर्ज किया गया, चूंकि बच्चा नाबालिग और मानसिक रूप से कमजोर था, इसलिए दिल्ली पुलिस की नोडल एजेंसी एएचटीयू ने जांच अपने हाथ में ली।
एसीपी सुरेश कुमार की देखरेख में इंस्पेक्टर मुकेश कुमार और एएसआई अजय कुमार झा की टीम ने दिन-रात मेहनत की। टीम ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज की जांच की, स्थानीय लोगों से पूछताछ की, तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल किया और सोशल मीडिया पर बच्चे की जानकारी फैलाई। परिवार और रिश्तेदारों से भी बात की गई।
इन सब प्रयासों के बाद बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
जांच में सामने आया कि बच्चा दिल्ली की निरंकारी कॉलोनी में किराए के मकान में रहता था। वह दिन में गाड़ियां साफ करने और रात में सिक्योरिटी गार्ड का काम करता था। मानसिक स्थिति के कारण वह घर से बाहर निकल गया और रास्ता भटककर आनंद विहार बस टर्मिनल पहुंच गया। कोई अपहरण नहीं था, बल्कि वह खुद भटक गया था।
दूसरा मामला 15 साल के एक लड़के का है। 22 जनवरी 2026 को वजीराबाद इलाके से यह बच्चा लापता हुआ।
24 जनवरी को वजीराबाद थाने में बीएनएस की धारा 137(2) के तहत एफआईआर दर्ज हुई। इस संवेदनशील मामले को भी एएचटीयू ने संभाला। एसीपी सुरेश कुमार के मार्गदर्शन में इंस्पेक्टर मुकेश कुमार, एएसआई महेश और हेड कांस्टेबल नरेश कुमार की टीम ने लगन से काम किया। स्थानीय पूछताछ, तकनीकी सर्विलांस और फील्ड जांच के अलावा परिवार से जानकारी ली गई। एएसआई महेश की खास सूचना पर 4 फरवरी 2026 को आजादपुर सब्जी मंडी से लड़के को बरामद कर लिया गया।
जांच से पता चला कि बच्चा परिवार में झगड़े के बाद घर छोड़कर अपनी मौसी के घर चला गया था। यहां भी अपहरण नहीं था, बल्कि घरेलू विवाद के कारण वह भाग गया था।
दोनों मामलों में बच्चों को सुरक्षित घर पहुंचाया गया। दोनों मामलों को संबंधित थानों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सौंप दिया गया। परिवारों और स्थानीय लोगों ने एएचटीयू की टीम के तेज और समन्वित प्रयासों की खूब सराहना की। इन सफलताओं से इलाके में कानून-व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा है।












