दिल्ली क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई, रोहित चौधरी गैंग का सदस्य गिरफ्तार
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एनआर–II टीम ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। एसीपी गिरीश कौशिक की सतर्क निगरानी और इंस्पेक्टर संदीप स्वामी के कुशल नेतृत्व में पुलिस ने प्रदीप गुलाटी उर्फ पारस को गिरफ्तार किया है।
प्रदीप गुलाटी, रोहित चौधरी गैंग का एक सक्रिय सदस्य है और दिल्ली के कालकाजी का निवासी है। उसके पास से भारी मात्रा में अवैध हथियार और गोलियां बरामद की गई हैं। इस गिरफ्तारी के बाद संबंधित धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।
हेड कॉन्स्टेबल सुमित कुमार को गैंग के सदस्यों द्वारा जबरन वसूली, अवैध हथियार सप्लाई और हिंसक गतिविधियों में शामिल होने की खुफिया जानकारी मिली।
इसके बाद क्राइम ब्रांच की एक टीम ने निगरानी और जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि अरविंद गुप्ता उर्फ डिसिल्वा, रोहित चौधरी गैंग का एक सक्रिय सदस्य है, जो अवैध हथियार सप्लाई कर रहा था और अपहरण व वसूली जैसी गंभीर घटनाओं की योजना बना रहा था। आगे की जांच में यह भी जानकारी मिली कि उसका साथी प्रदीप गुलाटी उर्फ पारस कालकाजी में हथियार जमा कर रखता है।
26 फरवरी को एसआई प्रदीप ढुल, एसआई सुखविंदर सिंह, एसआई रवि राणा, एएसआई सुनील कुमार, एचसी सुमित कुमार, एचसी राज आर्यन, एचसी नितिन कुमार, एचसी अजय सहवात, एचसी नवल कुमार, एचसी सुमेर सिंह, एचसी योगेंद्र, कॉन्स्टेबल योगेंद्र और कॉन्स्टेबल नितेश की टीम को इंस्पेक्टर संदीप कुमार के नेतृत्व में और एसीपी गिरीश कौशिक की निगरानी में इस जानकारी की सत्यता जांचने और अपराधियों को पकड़ने के लिए तैनात किया गया। टीम ने खुफिया जानकारी के आधार पर जमीन पर सावधानीपूर्वक निगरानी की और ऑपरेशन को पूरी सुरक्षा के साथ अंजाम दिया।
गिरफ्तारी के बाद प्रदीप गुलाटी से पूछताछ में पता चला कि वह अरविंद गुप्ता का करीबी साथी है। उसने बताया कि अरविंद गुप्ता ने उसे एक महीने पहले हथियार और गोलियां दी थीं ताकि वह उन्हें सुरक्षित रखे और भविष्य में वसूली और आतंक फैलाने वाले अपराधों में इस्तेमाल कर सके।
पुलिस ने उसके कब्जे से 3 सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल, 1 देसी कट्टा और 22 जिंदा राउंड के साथ एक लाल बैग बरामद किया।
जानकारी के अनुसार, प्रदीप गुलाटी पंजाब के जालंधर का निवासी है, लेकिन उसका परिवार 1998 में दिल्ली आकर दाबड़ी, जनकपुरी में बस गया। उसने 10वीं तक पढ़ाई की, लेकिन खराब संगति और जुआ व शराब की आदतें पकड़ गईं।
क्रिकेट बेटिंग में भारी नुकसान होने के कारण वह आर्थिक रूप से दबाव में था। लगभग एक साल पहले उसकी मुलाकात अरविंद गुप्ता से हुई, जिसने उसे गैंग में शामिल कर लिया और वह गैंग के लिए काम करने लगा।












