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छग विधानसभा : सदन में गूंजा धान खरीद का मुद्दा, विपक्ष ने कहा- कई किसान अभी भी नहीं बेच पाए धान,हुए निलंबित


रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का आज चौथा दिन है। विधानसभा के चौथे दिन सदन में एक बार फिर धान खरीद और किसानों की समस्याओं से जुड़ा मुद्दा गूंजा।छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को कांग्रेस ने धान खरीद पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया। स्थगन अग्राह्य होने पर जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी विधायक हंगामा करते गर्भगृह तक पहुंच गए।गर्भगृह पहुंचने पर विपक्षी विधायक स्वत: निलंबित हो गए। वे हंगामा और नारेबाजी करते हुए सदन के बाहर चले गए। कांग्रेस ने पूरे दिन की कार्यवाही से बहिष्कार कर दिया।

शून्यकाल में कांग्रेस ने धान खरीद के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार को घेरने की कोशिश की। नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने प्रस्ताव पेश करते हुए आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर किसानों से धान की खरीद नहीं कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि एससी, एसटी वर्ग के किसान नही बेच पाए। जिसके बाद उन्होंने स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार कर चर्चा कराने की मांग की। सदन की कार्यवाही के दौरान पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने सरकार से फिर से धान खरीद शुरू कर किसानों से धान खरीद करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अगर सरकार धान खरीद नहीं कर रही है तो किसानों को कर्जमाफी किया जाए।

उमेश पटेल ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने धान खरीदी तो की है, लेकिन कई किसान आज भी अपना धान नहीं बेच पाए हैं। उमेश पटेल ने दावा करते हुए कहा कि किसानों ने जितना कृषि लोन लिया, उतना भी धान नही बेच पाए हैं। ऐसे में या तो ऋण माफी की जाए, नही तो धान खरीदी फिर शुरू की जाए। इस दौरान अकलतरा विधायक राघवेंद्र सिंह ने कहा कि जांजगीर में 7 हजार किसान नही बेच पाए, मेरे जिले में परेशान किसान जहर पी लिया, एक किसान टावर पर चढ़ गया।विपक्ष का कहना था कि, इस सीजन में धान खरीद में काफी अनियमितता बरती गई है। इसलिए पिछले बार से भी कम धान मिला है। सरकार धान खरीदना ही नहीं चाहती थी। उनका आरेाप था कि, लोगों को बेवकूफ बनाया गया है, पहले दिन से ही किसानों को चोर समझा गया है। इसलिए अलग- अलग हथकंडे अपनाए गए हैं।विपक्षी विधायकों ने आरोप लगाए कि, किसानों ने सक्ती, जैजैपुर, पामगढ़ अकलतरा, और जांजगीर- चांपा जिले समेत पूरे छत्तीसगढ़ के बहुत सारे किसानों ने केसीसी से लोन लिया था। लेकिन उनका धान नहीं खरीदा गया। ऐसे में सरकार कर्ज माफी करे या फिर उनका धान खरीदे।

विधायकगणों ब्यास कश्यप ,रामकुमार यादव,भोलाराम साहू तथा कुँवर सिंह निषाद ने धान खरीद को लेकर सरकार को जमकर घेरा ।उन्होंने आरोप लगाया कि धान खरीद के नाम पर किसानों को प्रताड़ित किया गया। किसानों को डराने और धमकाने का काम किया गया। किसानों की स्थिति बहुत खराब है। लोन लेकर खेती करने वाले किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो गए।

इस दौरान नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि जानबूझकर किसानों से का धान नहीं खरीदा गया है। एससी, एसटी वर्ग के किसान धान नहीं बेच पाए, किसान खून के आंसू रोए हैं। बता दें कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25 लाख 24 हजार 339 किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है।पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार की मंशा पहले स्पष्ट है कि धान और किसान पर चर्चा नहीं करानी है। छत्तीसगढ़ में आज अधिकारी राज चल रहा है। किसानों के घर में, खलिहान में जबरदस्ती प्रवेश किया गया। धान बेचने के लिए टोकन मांगने पर किसानों के घर अधिकारी भेजे गए. किसानों को चोर समझा गया। यह बेहद गम्भीर मामला है. इस पर चर्चा होनी चाहिए.

भूपेश बघेल ने कहा कि मेरे घर पर भी अधिकारी बलात तरीके से घुसे थे। इस मामले में अगर चर्चा नहीं होती तो कम से कम सरकार की ओर से जवाब दिया जाना चाहिए।

धान खरीद के मुद्दे पर लाए गए स्थगन प्रस्ताव को सभापति ने अग्राह्य कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि बजट सत्र के दौरान स्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाता। जिसके बाद सदन में कांग्रेस विधायकों का हंगामा शुरू हो गया। देखते ही देखते कुछ विधायक विधानसभा के गर्भगृह तक पहुंच गए और वहीं नारे लगाने लगे। माहौल को गर्माता देख कांग्रेस के विधायकों को निलंबित कर दिया गया। निलंबन के बाद सभी कांग्रेस विधायक सदन से बाहर निकल गए।

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