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छत्तीसगढ़ लिंगानुपात में देश में आया अव्वल, बेटियों के जन्म मन रहा उत्सव


रायपुर। छत्तीसगढ़ ने बेटियों के मामले में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। देश में जन्म के समय लिंगानुपात छत्‍तीसगढ़ में बाल‍िकाओं का जन्‍म के समय ल‍िंगानुपात 929 (प्रति 1000 पुरुष) तक पहुंच गया है, यह आंकड़ा पूरे देश में सबसे अधिक है। यह उपलब्धि प्रदेश में बालिकाओं के जन्म को प्रोत्साहन देने वाली नीतियों, सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक चेतना का प्रतिफल है।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने उक्त जानकारी देते हुए आज बताया क‍ि भारत सरकार के कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम एवं लिंगानुपात में सुधार के लिए गर्भाधान पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसी पीएनडीटी) अधिनियम, 1994 लागू किया गया, जिसे वर्ष 2003 में और अधिक सुदृढ़ किया गया। यह अधिनियम अल्ट्रासाउंड, एमनियोसेंटेसिस, आईवीएफ जैसी तकनीकों के माध्यम से भ्रूण के लिंग परीक्षण एवं चयन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है। उन्होंने कहा किबालिकाओं के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं समग्र सशक्तिकरण के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। यह दिवस बालिकाओं के सम्मान, समान अवसर और सुरक्षित भविष्य के लिए सामूहिक संकल्प का प्रतीक है।

राज्य में पीसी पीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कठोर और सतत निगरानी की जा रही है। अल्ट्रासाउंड केंद्रों का नियमित निरीक्षण, सत्यापन एवं पंजीयन/नवीनीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है। जिला एवं राज्य स्तरीय सलाहकार समितियों की नियमित बैठकों के माध्यम से अधिनियम के उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई एवं कानूनी प्रक्रिया को और अधिक मजबूत किया गया है।

उन्होंने जानकारी दी कि स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ द्वारा कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम, लिंग आधारित भेदभाव के उन्मूलन तथा किशोरियों के सशक्तीकरण के लिए निरंतर जन-जागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं। राज्य के सभी जिलों में निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ करने, नियमित समीक्षा तथा अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर अनिवार्य सूचना प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ का 974 का जन्म के समय लिंगानुपात इस बात का प्रमाण है कि हमारा समाज बेटियों के सम्मान और संरक्षण के प्रति निरंतर जागरूक हो रहा है। बेटियों को बोझ मानने की बजाय अब उत्सव मनाया जा रहा है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों, जिला प्रशासन, महिला समूहों और जनप्रतिनिधियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि पीसी पीएनडीटी अधिनियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करते हुए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बेटी का सम्मान बढ़ाओ के संकल्प को जमीनी स्तर तक साकार किया जाए, ताकि प्रदेश की हर बालिका सुरक्षित, स्वस्थ और सशक्त भविष्य की ओर अग्रसर हो सके।” स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ प्रदेश को बालिकाओं के लिए सुरक्षित, समान एवं अवसरों से परिपूर्ण बनाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है, ताकि हर बेटी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सके।

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