नवादा। जिला समाहरणालय अवस्थित डीपीओ आईसीडीएस के पद पर कार्यरत निरुपमा शंकर ने घर बैठे सरकारी एप्प तथा आईडी पासवर्ड का दुरुपयोग करते हुए आंगनवाड़ी केंद्रों का फर्जी तरीके से निरीक्षण करने तथा सरकारी कार्य में धोखाधड़ी करने के मामले का भंडाफोड़ हुआ है।
बिहार के मुख्य सचिव तथा समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव से इस आपराधिक मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की गई है। सूचना अधिकार कार्यकर्ता प्रणव कुमार चर्चील ने रविवार को बताया कि बिहार के मुख्य सचिव तथा समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव को शपथ पत्र के साथ दिए गए शिकायत पत्र में कहा है कि जिला प्रोग्राम कार्यालय के कार्यक्रम पदाधिकारी निरुपमा शंकर ने आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच के नाम पर घोर फर्जीवाड़ा कर आपराधिक कृत्य किया है।
आंगन एप्प से सारे फर्जीवाडे को चिन्हित कर प्रमाण के तौर पर पेश किया जा रहा है। ताकि धोखाधड़ी व फर्जीबाड़े जैसे अपराध के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर सरकारी कार्यक्रमों के साथ धोखा करने वाले इस पदाधिकारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा सके ।उन्होंने कहा कि 3 मिनट में दो प्रखंडों का निरीक्षण कर फर्जी बड़े का कृतिमान स्थापित किया गया है।
शिकायतकर्ता चर्चिल्ल ने शिकायत पत्र में लिखा है कि 22 अप्रैल 2025 को जिला कार्यक्रम पदाधिकारी निरुपमा शंकर ने कौवाकोल प्रखंड के शेखोदेवरा पूर्वी आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण प्रातः 6:42 पर आंगन एप्प के माध्यम से किया । जिसमें 12 बच्चों की उपस्थिति बताते हुए पका हुआ गरम भोजन तथा सभी गतिविधियां संचालित होने की फर्जी रिपोर्ट दी गई। ठीक 3 मिनट बाद यानी प्रातः 6:45 में उन्होंने रोह प्रखंड के छनौन गांव में अवस्थित आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण दिखाया। जिसमें 23 बच्चों को पका हुआ गरम भोजन परोसने तथा सभी गतिविधियां संचालित पाई गई।
सबसे गंभीर फर्जीवाड़ा तो यह है कि यह निरीक्षण प्रातः 6:42 और 6:45 पर किया गया है। जबकि निदेशक आईसीडीएस बिहार पटना के द्वारा बिहार राज्य के सभी जिला पदाधिकारी को जारी शासनादेश पत्रांक संख्या 6959 दिनांक 26 नवंबर 2022 के अनुसार 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन 7:30 बजे से 11:30 बजे पूर्वाह्न तक की होना निश्चित है।जब निरीक्षण किए गए समय में केंद्र का संचालन ही प्रारंभ नहीं होता है तो डीपीओ द्वारा समय से पूर्व किए गए निरीक्षण में बच्चों को पका हुआ गरम भोजन तथा सभी गतिविधियां संचालित किए जाने जैसे फर्जी रिपोर्ट प्रस्तुत करना कितना उचित माना जाएगा । 7:30 सुबह केंद्र संचालित होने के आदेश के विरुद्ध प्रातः 6:45 बजे ही निरुपमाशंकर ने फर्जी निरीक्षण दिखाकर व्यवस्था के साथ घोर अपराध किया है।
डीपीओ निरुपमा शंकर ने अकबरपुर परियोजना के कई केंद्रों का निरीक्षण अपराह्न 3:05 में अपलोड दिखाया है ।लेकिन निरीक्षण किए गए केंद्रों के पंजी पर डीपीओ का हस्ताक्षर नहीं है जो एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़े का प्रमाण है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि अगर भ्रष्टाचार में शामिल डीपी निरूपमा शंकर के विरुद्ध प्राथमिकी दर्जकर कार्रवाई नहीं की गई तो मामला उच्च न्यायालय में ले जाऊंगा।
डीपीओ के फर्जीवाड़े व धोखाधड़ी का भंडाफोड़, बिहार के मुख्य सचिव से कार्रवाई की मांग












