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नए आधार वर्ष के साथ भारत की जीडीपी वृद्धि दर मजबूत बने रहने की उम्मीद


नई दिल्ली। नई जीडीपी सीरीज (बेस ईयर 2022-23) शुक्रवार को जारी होने वाली है। इससे पहले सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा गठित एक उप-समिति ने जीडीपी अनुमानों के लिए नई सीरीज में जीएसटी डेटा के अधिक उपयोग की सिफारिश की है।

उप-समिति की यह रिपोर्ट राष्ट्रीय खातों के बेस ईयर को वित्त वर्ष 2022-23 में संशोधित करने की प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे एमओएसपीआई ने शुरू किया है। 2011-12 सीरीज में जीएसटी डेटा का उपयोग तिमाही राष्ट्रीय खातों और वार्षिक राष्ट्रीय खातों के कुछ क्षेत्रों में किया गया था। भारत अब जीडीपी का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर रहा है। 

इसके साथ ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का बेस भी 2024 में अपडेट किया जाएगा, जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचना को बेहतर तरीके से दिखाना है, जिसमें डिजिटल कारोबार और सेवा क्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी शामिल है। इस बदलाव में असंगठित क्षेत्र के बेहतर आकलन और जीएसटी जैसे नए डेटा स्रोतों का इस्तेमाल शामिल है।

 इसके अलावा ई-वाहन (वाहन पंजीकरण) और प्राकृतिक गैस की खपत से जुड़े आंकड़ों को भी शामिल किया जाएगा। नई पद्धति से भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।

 पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसमें मुख्य योगदान घरेलू मांग का होगा। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8 से 8.1 प्रतिशत के बीच रह सकती है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था ने मजबूत रफ्तार बनाए रखी है। 

अक्टूबर-दिसंबर 2025 (चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही) के उच्च-आवृत्ति आंकड़े भी आर्थिक गतिविधियों में मजबूती दिखाते हैं। 

 यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में प्रतिकूल बेस इफेक्ट के बावजूद जीडीपी वृद्धि दर 8.3 प्रतिशत तक रह सकती है। वित्त वर्ष 2025-26 के दूसरे अग्रिम जीडीपी अनुमान, पिछले तीन वित्त वर्षों के जीडीपी आंकड़े और नए बेस 2022-23 के अनुसार त्रैमासिक जीडीपी आंकड़े शुक्रवार को जारी किए जाएंगे।


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