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बिहार के सरकारी स्कूलों में 31 जनवरी काे हाेगा पीटीएम,बच्चाें के सर्वांगिण विकास पर जाेर


पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों के शिक्षा की स्थिति और उनके सर्वांगीण विकास को और अधिक मजबूत बनाने के लिए एक खास तैयारी की गयी है।बच्चाें के प्रारंभिक शिक्षा काे बेहतर बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने अभिभावकाें काे भी पूरी तरह सक्रिय करने की याेजना बनायी है, जिसके लिए प्राथमिक शिक्षा निर्देशालय ने राज्य के सभी जिलाें के शिक्षा पदाधिकारियाें काे एक पत्र जारी कर सभी प्रारंभिक विद्यालयाें में अभिभावक-शिक्षक संगाेष्ठी यानि पीटीएम करने का निर्देश दिया है।

जारी पत्र में अधिकारियाें काे 31 जनवरी काे पीटीएम करने का निर्देश दिया गया है। विभाग ने यह बैठक बच्चाें के सर्वांगिण विकास काे ध्यान में रखते हुए कुछ खास मुददाें काे चुना है।

विभाग ने पीटीएम का थीम रखा है-हम और आप मिलकर करेंगे बच्चाें का समग्र विकास। इस बार की पीटीएम का सबसे अहम मुद्दा बच्चों में बढ़ती मोबाइल और सोशल मीडिया की लत है। आज के समय में बच्चों का अधिक समय मोबाइल और सोशल मीडिया पर बीत रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई, व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को निर्देश दिया है कि वे अभिभावकों को बच्चों द्वारा मोबाइल और सोशल मीडिया के उपयोग को सीमित करने के लिए प्रेरित करें। साथ ही, बच्चों को वास्तविक जीवन की गतिविधियों और खेलकूद से जोड़ने पर जोर देने को कहा गया है, ताकि वे मोबाइल की दुनिया से बाहर निकलकर स्वस्थ गतिविधियों में शामिल हों।

पीटीएम के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता पर भी विशेष चर्चा की जाएगी। अक्सर देखा जाता है कि बच्चे बिना नाश्ता किए या भूखे स्कूल आ जाते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और सेहत दोनों प्रभावित होती हैं। ऐसे में शिक्षकों को अभिभावकों से यह कड़ा संदेश देने को कहा गया है कि वे अपने बच्चों को पोषण युक्त भोजन कराकर ही विद्यालय भेजें। बच्चों की सेहत और पोषण पर चर्चा करके स्कूल और परिवार के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकेगा, जिससे बच्चों का शारीरिक विकास भी सही दिशा में होगा।

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस पीटीएम का उद्देश्य सिर्फ बच्चों की पढ़ाई पर चर्चा करना नहीं है, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है। शिक्षकों को अभिभावकों को बच्चों की शैक्षणिक और अन्य उपलब्धियों से अवगत कराते हुए उन्हें बच्चों के व्यक्तित्व, सामाजिक व्यवहार, खेलकूद, कला, संस्कृति और नैतिक शिक्षा से जोड़ने की प्रेरणा देनी है। इसके साथ ही, बच्चों को मोबाइल और सोशल मीडिया की लत से दूर रखकर वास्तविक जीवन की गतिविधियों से जोड़ने के लिए भी अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा

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