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सूखा नशा और साइबर गैंग के खिलाफ अभियान


भागलपुर। बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद कानून-व्यवस्था की तस्वीर बदली है, लेकिन इसके साथ ही एक नई चुनौती भी सामने आई है। अब पारंपरिक शराब की तस्करी के साथ-साथ सूखा नशा यानी सिंथेटिक और प्रतिबंधित नशीले पदार्थों का प्रचलन युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है।

दूसरी ओर डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग से साइबर अपराधियों के गैंग भी सक्रिय हो गए हैं। ये दोनों मोर्चे फिलहाल बिहार पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। भागलपुर पुलिस रेंज के आईजी विवेक कुमार ने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि मौजूदा समय में बीएस (सूखा नशा) सप्लायर गैंग और साइबर क्रिमिनल नेटवर्क पुलिस के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस महानिदेशक के निर्देशानुसार इन दोनों प्रकार के अपराधों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

आईजी विवेक कुमार ने शनिवार को कहा कि शराबबंदी के बाद कुछ आपराधिक गिरोहों ने अपना फोकस बदलकर सूखे नशे की सप्लाई शुरू कर दी है। खासकर युवाओं को टारगेट कर स्कूल-कॉलेज के आसपास और शहरी इलाकों में यह नेटवर्क फैलाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस ने ऐसे कई सप्लायर गैंग को चिन्हित कर कार्रवाई शुरू कर दी है। हाल के महीनों में कई गिरफ्तारियां हुई हैं और पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर उनके नेटवर्क और लिंकेज की जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल छोटे सप्लायर को पकड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे चेन को तोड़ना जरूरी है। इसी उद्देश्य से पुलिस अब तकनीकी और खुफिया तंत्र का भी सहारा ले रही है। पकड़े गए गैंग के बैंक अकाउंट, कॉल डिटेल, डिजिटल ट्रांजेक्शन और सोशल मीडिया कनेक्शन की गहन जांच की जा रही है ताकि मुख्य सरगना तक पहुंचा जा सके। साइबर अपराध के मोर्चे पर भी पुलिस सक्रिय है।

डिजिटल प्रचलन के बढ़ते प्रभाव के साथ-साथ ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी कॉल सेंटर, ओटीपी ठगी, सोशल मीडिया हैकिंग और डिजिटल वॉलेट फ्रॉड जैसे मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। आईजी ने बताया कि साइबर क्रिमिनल अक्सर दूसरे राज्यों से भी ऑपरेट करते हैं, जिससे जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया जटिल हो जाती है। इसके बावजूद भागलपुर रेंज की पुलिस टीम लगातार छापेमारी कर रही है और कई साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है।

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