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बजट सत्र : विधानसभा में धान अधिप्राप्ति सर्वेक्षित जमीन का उठा मुद्दा


पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को वित्तीय वर्ष 2026- 27 के लिए जल संसाधन विभाग सहित कई विभागों के अनुदान मांगों पर चर्चा हो रही है। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सर्वेक्षित जमीन की खरीद बिक्री और धान अधिप्राप्ति के लक्ष्य को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के सदस्यों ने प्रस्न किया।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) विधायक सर्वजीत ने सरकार से प्रश्न किया कि बिहार के किसानों का धान बंगाल और उत्तर प्रदेश के लोग खरीद रहे हैं, किसान औने पौने दाम में बेचने के लिए मजबूर हैं। बिहार में डबल इंजन की सरकार है तो फिर किसान क्यों कम कीमत में धान बेचने को मजबूर हो रहे हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने मंत्री का बचाव किया और कहा कि मंत्री ने कहा है, कि केंद्र सरकार से बातचीत कर रहे हैं तो जल्द समाधान हो जाएगा।

राजद विधायक कमरेंद्र कुमार ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य 45 लाख मिट्रिक टन निर्धारित था, जिसे घटा कर 36 लाख 85000 एमटी कर दिया गया है। इस पर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेसी सिंह ने कहा कि, केंद्र सरकार से हम बातचीत कर रहे हैं, केंद्रीय मंत्री से समय भी मांगा गया हैं, और जल्द ही इसका समाधान हो जाएगा।

विधानसभा में जदयू विधायक मंजीत कुमार सिंह ने सर्वेक्षित जमीन की खरीद बिक्री का मामला उठाया। बरौली विधायक मंजीत कुमार सिंह के सवाल पर उपमुख्यमंत्री-सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि, विशेष सर्वेक्षण का कार्य पूर्ण किया जाएगा।

मंजीत सिंह ने कहा कि बिहार में क्षेत्रफल का 20 प्रतिशत हिस्सा सर्वेक्षित है। एक समय सीमा निर्धारित कर दी जाए, जिससे झंझट न हो।

इस पर विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर सर्वे का काम दो वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री के दिशा निर्देश पर भूमि कल्याण जन संवाद शुरू किया गया है, जिससे लोगों को राहत मिले। सिर्फ परिमार्जन का 40 लाख आवेदन है। इस पर भी काम किया जा रहा है, लेकिन जिसपर विवाद है, वहां न्यायालय के आदेश का इंतजार करना होगा, बाकी जिसमें कोई समस्या नहीं है, उसे जल्द सुलझाने का काम किया जा रहा है।

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