मेन ब्रांच सहित जिले के लगभग सभी बैंकों के मुख्य दरवाजे पर सुबह से ही बैंक कर्मियों का हुजूम उमड़ पड़ा। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए कर्मियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट संदेश था हमने सौगंध खाई है छीन के लाएंगे अपना हक। सेंट्रल बैंक एम्प्लॉइज यूनियन के महासचिव मनीष कुमार ने सभा को संबोधित करते हुए इसे एक क्रांतिकारी आह्वान करार दिया। उन्होंने कहा आज की यह हड़ताल केवल एक विरोध नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व और बैंकिंग क्षेत्र के भविष्य को बचाने की हुंकार है। जब बात हमारे अधिकारों और सम्मान की आती है, तो बिहार के बैंक कर्मी एक अभेद्य दीवार बनकर खड़े होते हैं।
यूनियन के नेता सुनील कुमार ने स्पष्ट किया कि 5-दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग लंबे समय से लंबित है और अब बैंक कर्मी किसी भी समझौते के मूड में नहीं हैं। हड़ताल में एआईबीईएफ, एआईबीओसी, एनसीबीई, एआईबीओए, बीईएफआई, जैसे तमाम प्रमुख संगठनों ने एकजुटता दिखाई। हड़ताल के कारण चेक क्लीयरेंस, कैश डिपॉजिट और अन्य बैंकिंग सेवाएं बाधित रहीं। हालांकि, यूनियन ने इसे बैंक कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्य कुशलता के लिए अनिवार्य कदम बताया है। महासचिव ने सभी कर्मियों से अपील की कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं संघर्ष जारी रहेगा।
पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर बैंक कर्मियों ने किया हड़ताल
सारण। छपरा यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आज सारण सहित पूरे देश में बैंकिंग सेवाएं लगभग पूरी तरह ठप रहीं। अपनी प्रमुख मांग 5-दिवसीय बैंकिंग को लागू करने के संकल्प के साथ में बैंक कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन किया।












