सीवान। नगर थाना क्षेत्र के थाना मोड़ के समीप मंगलवार को एक अज्ञात महिला की खुले नाले में गिरने से दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना एक बार फिर शहर में खुले और असुरक्षित नालों के साथ-साथ नगर प्रशासन की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नाले पर सुरक्षा व्यवस्था, जाली या रेलिंग लगी होती तो शायद महिला की जान बच सकती थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला काफी देर से थाना मोड़ के आसपास दुकानदारों से खाने-पीने के लिए मदद मांग रही थी। इसके बाद वह सड़क किनारे बने नाले के पास जाकर बैठ गई। अचानक उसका संतुलन बिगड़ा और वह सीधे नाले में जा गिरी। आसपास मौजूद लोगों को घटना की जानकारी तब हुई, जब वहां से गुजर रहे एक सब-इंस्पेक्टर की नजर नाले में पड़ी महिला पर गई।
सब-इंस्पेक्टर ने बिना समय गंवाए स्थानीय लोगों की सहायता से महिला को नाले से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना मिलते ही नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में नगर प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि शहर के कई हिस्सों में खुले नाले लंबे समय से हादसों को न्योता दे रहे हैं, लेकिन इन्हें सुरक्षित बनाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद नालों पर जाली या रेलिंग लगाने की व्यवस्था नहीं की गई, जिसका खामियाजा आम लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
नगर इंस्पेक्टर अविनाश कुमार ने बताया कि फिलहाल मृतका की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस आसपास के दुकानदारों और स्थानीय लोगों से पूछताछ कर उसकी पहचान कराने का प्रयास कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि होगी। पहचान होने पर परिजनों को सूचना देकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह हादसा केवल एक महिला की मौत नहीं, बल्कि शहर की बदहाल बुनियादी व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता की भी दर्दनाक तस्वीर पेश करता है। अब देखना यह होगा कि इस घटना के बाद नगर प्रशासन खुले नालों को सुरक्षित बनाने की दिशा में कोई ठोस पहल करता है या फिर किसी अगले हादसे का इंतजार किया जाएगा।





