बाहरी दिल्ली के टिकरी कलां में एक सीएनजी स्टेशन पर हुई दुर्घटनात्मक विस्फोट में बुधवार को तीन युवकों की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद परिवार बिखर गया। आजीविका का संकट आश्रितों पर सामने चुनौती बन गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि सीएनजी गाड़ी यदि सफर को सस्ता करती है तो वह हाइड्रोटेस्ट से लेकर रीफ्यूलिंग तक मेंटेनेंस और सेफ्टी से जुड़ी टेक्निकल चीजों पर ध्यान मांगती है। यदि आपके पास भी सीएनजी गाड़ी है तो सुरक्षा के उपाय जानना बहुत जरूरी है। सीएनजी (CNG) गाड़ियां माइलेज और बचत के लिहाज से काफी बेहतरीन मानी जाती हैं, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही एक बड़े हादसे का कारण बन सकती है या फिर गाड़ी को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। अगर आप भी सीएनजी कार चलाते हैं, तो इन गलतियों को करने से बचें:
हमेशा कंपनी-फिटेड (OEM) सीएनजी किट या सरकार द्वारा प्रमाणित आफ्टरमार्केट किट ही लगवाएं। लोकल और अप्रमाणित किट से गैस लीक या आग लगने का जोखिम बढ़ जाता है। कार को हमेशा पेट्रोल मोड पर ही स्टार्ट करना चाहिए। सीधे सीएनजी पर स्टार्ट करने से इंजन और सीएनजी किट के कंपोनेंट्स पर ज्यादा दबाव पड़ता है, जिससे इंजन की उम्र कम हो जाती है। सीएनजी सिलेंडर की हर 3 साल में 'हाइड्रो-टेस्टिंग' कराना अनिवार्य है। इस जांच को टालने की भूल न करें, क्योंकि पुराना या क्षतिग्रस्त सिलेंडर बेहद खतरनाक हो सकता है। पेट्रोल कारों की तुलना में सीएनजी कारों के स्पार्क प्लग और एयर फिल्टर जल्दी घिसते हैं। हर 10,000 से 15,000 किमी पर इन्हें चेक या रिप्लेस जरूर कराएं। सिलेंडर में क्षमता से अधिक या अत्यधिक प्रेशर में सीएनजी न भरवाएं। गर्मी के मौसम में गैस फैलती है, इसलिए सिलेंडर में थोड़ी गुंजाइश छोड़ना सुरक्षित रहता है।
सीएनजी कार के केबिन में या गैस भरवाते समय धूम्रपान करना अथवा आग या चिंगारी उत्पन्न करने वाली चीज का उपयोग करना जानलेवा साबित हो सकता है। सीएनजी किट का काम किसी भी आम मैकेनिक से न कराएं। हमेशा अधिकृत सर्विस सेंटर या एक्सपर्ट से ही ट्यूनिंग और लीकेज चेक कराएं। यदि कार के अंदर या पास में सीएनजी की गंध (मर्कैप्टन की गंध) आए, तो तुरंत कार का सीएनजी वाल्व बंद कर दें और कार स्टार्ट न करें। गाड़ी में थोड़ा पेट्रोल हमेशा बनाकर रखें। यदि कभी रास्ते में सीएनजी खत्म हो जाए या किट में खराबी आए, तो पेट्रोल का होना बेहद जरूरी है।





