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Insta-Youtube नहीं, अब Club App देगा छोटे क्रिएटर्स को बड़ा मंच, Viral हुए बिना भी तगड़ी होगी कमाई

Insta-Youtube नहीं, अब Club App देगा छोटे क्रिएटर्स को बड़ा मंच, Viral हुए बिना भी तगड़ी होगी कमाई
सोशल मीडिया पर पैसा कमाना सुनने में जितना आसान लगता है, हकीकत में उतना सीधा नहीं है। केवल वीडियो बनाने या लाखों व्यूज लाने से ही कमाई नहीं होती, बल्कि YouTube, Instagram और TikTok जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स के अपने कड़े नियम और शर्तें हैं। उदाहरण के लिए, YouTube पर ऐड्स से कमाई शुरू करने के लिए कम से कम 1,000 सब्सक्राइबर और निश्चित वॉच टाइम या शॉर्ट्स व्यूज की जरूरत होती है। Instagram पर लाखों फॉलोअर्स होने के बावजूद क्रिएटर्स को प्लेटफॉर्म से सीधे पैसे नहीं मिलते।

इसी बीच, लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Kick ने 'Club' नामक एक नया मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जो क्रिएटर्स के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ कमाई केवल विज्ञापनों और करोड़ों व्यूज पर निर्भर नहीं है। क्लब का मुख्य दांव इस बात पर है कि यदि किसी क्रिएटर के पास कम लेकिन बेहद वफादार (लोयल) फैंस हैं, तो वह उनसे सीधे पैसे कमा सकता है। 19 अगस्त 2026 को आधिकारिक रूप से लॉन्च हुए इस ऐप ने शुरुआती दो महीनों में ही 1 लाख से अधिक मेंबर्स जोड़ लिए। कंपनी का दावा है कि यहाँ साइन-अप करने वाले 90% क्रिएटर्स एक्टिव हैं और कुछ कम्युनिटीज में 30 हजार से ज्यादा मेंबर्स जुड़ चुके हैं।

क्लब का मॉनेटाइजेशन मॉडल बेहद सरल है: पेड मेंबरशिप: क्रिएटर्स फैंस से मासिक शुल्क ले सकते हैं। खास पोस्ट या वीडियो को पेवॉल के पीछे रखा जा सकता है। फैंस टिप्स दे सकते हैं या सीधे बातचीत और खास कनेक्शन के लिए भुगतान कर सकते हैं। क्लब के सीईओ हेनरिक पोलमैन इसे अधिक "ह्यूमन" सोशल मीडिया अनुभव बताते हैं। उनका लक्ष्य फॉलोअर्स की संख्या गिनने के बजाय ऐसे छोटे लेकिन मजबूत फैन-समूह बनाना है जो अपने पसंदीदा क्रिएटर्स पर पैसे खर्च करने के लिए तैयार हों। भारत में गेमर्स और लाइव स्ट्रीमर्स इस मॉडल को काफी पसंद कर रहे हैं।

दूसरी तरफ, YouTube आज भी सबसे शक्तिशाली प्लेटफॉर्म है, जहाँ चैनल मेंबरशिप, सुपर चैट, सुपर थैंक्स और डिजिटल गिफ्ट्स जैसी फैन-फंडिंग सुविधाएं मौजूद हैं। YouTube अपने फैन-फंडिंग रेवेन्यू का 70% और ऐड्स रेवेन्यू का 55% हिस्सा क्रिएटर्स को देता है। इसके मुकाबले, क्लब क्रिएटर्स की कुल कमाई में से 20% का प्लेटफॉर्म कट रखता है (यानी क्रिएटर को 80% देता है)। संक्षेप में कहें तो, YouTube का ध्यान बड़े पैमाने और ज्यादा व्यूज पर है, जबकि क्लब का दांव कम लेकिन पैसे खर्च करने वाले वफादार फैंस पर है। हालांकि, क्लब की असली परीक्षा आने वाले समय में होगी, जहाँ यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या फैंस नए प्लेटफॉर्म पर जाकर अपने पसंदीदा क्रिएटर्स को हर महीने भुगतान करने के लिए तैयार होते हैं या नहीं।

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