शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को पत्र लिखा है। पत्र के जरिए परिवहन मंत्री से अपील की है कि रैपिडो, ओला और उबैर के चलते राज्य में हजारों की संख्या में रिक्शा चला रहे मराठी युवकों को आजीविका से वंचित करना उचित नहीं है। राउत ने पत्र में लिखा- महोदय, राज्य के कुछ मंत्रियों के रैपिडो कंपनी के साथ वित्तीय और व्यावसायिक संबंध हैं। रैपिडो ने अब तक दही हांडी, गणेशोत्सव और कुछ मंत्रियों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रायोजित किया है और करोड़ों रुपए दिए हैं। कुछ मंत्रियों को चुनाव के लिए भी धनराशि दी है। इसलिए ऐसा लगता है कि हजारों रिक्शा चालकों को इनके नाम पर फंसाकर एहसान चुकाने की कोशिश की जा रही है।
संजय राउत ने आगे लिखा- जब महाराष्ट्र के वर्तमान उपमुख्यमंत्री का मूल पेशा ही रिक्शा चालक है, तो इस राज्य के रिक्शा चालकों की आजीविका छीनना उचित नहीं है। मैं इस मुद्दे पर रिक्शा चालक संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल के साथ आपसे मिलना चाहता हूं। उचित समय और स्थान की जानकारी दें। कृपया मुझे सूचित करें। हाल ही में संजय राउत ने केंद्र सरकार पर महाराष्ट्र के सहकारी क्षेत्र के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया था। 20 अगस्त को संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने और मुंबई में राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त विकास निगम कार्यालय के उद्घाटन पर चिंता व्यक्त की थी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संजय राउत की ओर से लिखे गए पत्र की प्रति सीएम देवेंद्र फडणवीस और शरद पवार को भी भेजी गई थी। राउत ने शहरी सहकारी बैंकिंग परिसंपत्तियों से संबंधित मंत्रालय के हालिया फैसलों पर आपत्तियां रखी थीं। राउत ने कहा था कि उन्होंने जानबूझकर पत्र मराठी में लिखा है ताकि जनता समझ सके कि उनके शब्दों में, महाराष्ट्र के शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के साथ किस प्रकार अन्याय किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि विधेयक जल्दबाजी में पारित किया गया था और एनयूसीएफडीसी के जरिए महाराष्ट्र और गोवा के शीर्ष शहरी सहकारी बैंक की संपत्ति को उसके सदस्यों की सहमति के बिना जब्त कर लिया गया था। उन्होंने इसे महाराष्ट्र के सहकारी आंदोलन पर सीधा हमला बताया था।





