बिहार के सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूलों में अब शिक्षकों के लिए समय पर विद्यालय पहुंचना और निर्धारित समय तक स्कूल में मौजूद रहना अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग ने नई समय-सारणी और ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है। नए प्रावधान के तहत यदि कोई शिक्षक तीन बार देर से स्कूल पहुंचता है या तीन बार निर्धारित समय से पहले विद्यालय छोड़ता है, तो उसके एक दिन के वेतन में कटौती की जा सकती है। शिक्षा विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य स्कूलों में अनुशासन, समय पालन और शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाना है। ऑनलाइन उपस्थिति को वेतन प्रक्रिया से जोड़कर शिक्षकों की नियमित मौजूदगी सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
सोमवार से शुक्रवार 9.30 से 4 बजे तक स्कूल: 6 अगस्त को जारी निर्देश के अनुसार सोमवार से शुक्रवार तक बिहार के सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूल सुबह 9.30 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होंगे। वहीं शनिवार को स्कूलों का संचालन सुबह 9.30 बजे से दोपहर 1 बजे तक होगा। यानी शनिवार को हाफ डे की व्यवस्था लागू रहेगी। इस बदलाव से शिक्षकों और विद्यार्थियों की साप्ताहिक कार्य-सारणी में भी परिवर्तन होगा। विभाग का मानना है कि एक समान समय-सारणी से विद्यालयों का संचालन अधिक व्यवस्थित होगा।
ई-शिक्षाकोष से दर्ज होगी उपस्थिति: बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की दैनिक उपस्थिति पहले से ही ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज की जा रही है। अब समय पर स्कूल पहुंचने और निर्धारित अवधि तक विद्यालय में रहने को भी अधिक गंभीरता से देखा जाएगा। नियम के अनुसार, तीन बार देर से आने या तीन बार समय से पहले स्कूल छोड़ने की स्थिति में एक दिन के वेतन की कटौती की जा सकती है। इससे शिक्षकों के लिए केवल ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि वास्तविक समय पर विद्यालय में मौजूद रहना भी जरूरी होगा।
फर्जी हाजिरी पर भी विभाग सख्त: शिक्षा विभाग ऑनलाइन उपस्थिति में गड़बड़ी को लेकर भी सख्त रुख अपना रहा है। पुराने फोटो या अन्य गलत तरीकों से उपस्थिति दर्ज कराने की शिकायतों पर जांच और कार्रवाई की व्यवस्था की गई है। विभाग का जोर इस बात पर है कि ऑनलाइन दर्ज होने वाली हाजिरी शिक्षक की वास्तविक उपस्थिति को ही दर्शाए। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। इससे साफ है कि निगरानी केवल मोबाइल से उपस्थिति दर्ज कराने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शिक्षक के स्कूल पहुंचने के समय और निर्धारित कार्य अवधि तक मौजूद रहने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
समय पालन के साथ पढ़ाई की गुणवत्ता भी जरूरी: नई व्यवस्था से सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियमितता और अनुशासन बेहतर होने की उम्मीद है। लंबे समय से शिक्षकों की उपस्थिति और समय पालन को लेकर उठने वाले सवालों के बीच ऑनलाइन हाजिरी और वेतन कटौती जैसे प्रावधानों को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, स्कूल सुधार की असली सफलता केवल शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज होने से तय नहीं होगी। शिक्षक समय पर स्कूल पहुंचे, पूरे समय विद्यालय में रहें और उस दौरान बच्चों को प्रभावी ढंग से पढ़ाएं—तभी इस व्यवस्था का उद्देश्य पूरा होगा।
असली पैमाना होगा बच्चों का सीखने का स्तर: सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधार की चर्चा अक्सर भवन, डिजिटल व्यवस्था, ऑनलाइन हाजिरी और प्रशासनिक नियमों तक सीमित रह जाती है। लेकिन इन सभी प्रयासों का अंतिम उद्देश्य बच्चों को बेहतर शिक्षा देना है। यदि शिक्षक नियमित रूप से स्कूल पहुंचते हैं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण करते हैं, तभी इसका वास्तविक लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचेगा। शनिवार को हाफ डे, ऑनलाइन उपस्थिति की निगरानी और तीन बार देर से आने पर वेतन कटौती जैसे प्रावधान स्कूलों में अनुशासन मजबूत करने की दिशा में अहम कदम हैं। अब इनका असर बच्चों की पढ़ाई और सीखने के स्तर पर कितना पड़ता है, यही इस पूरी व्यवस्था की असली कसौटी होगी।





