पीएम मोदी का डीपफेक वीडियो वायरल करने की साजिश, पाकिस्तानी यूजर्स पर प्रदर्शन भड़काने का आरोप

पीएम मोदी का डीपफेक वीडियो वायरल करने की साजिश, पाकिस्तानी यूजर्स पर प्रदर्शन भड़काने का आरोप

नई दिल्ली। भारतीय इंटेलिजेंस एजेंसियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टारगेट करने के खास इरादे से डीपफेक वीडियो की संख्या में अचानक बढ़ोतरी देखी है। ऐसे वीडियो का मकसद युवाओं को पीएम को टारगेट करने के लिए उकसाना है।

ऐसे बहुत सारे वीडियो तेजी से सर्कुलेट हो रहे हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी हाल के प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने वाले स्टूडेंट्स के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की सोच रहे हैं। पाकिस्तानी हैंडल्स जो भी वीडियो ऑनलाइन डालने की कोशिश कर रहे हैं, उनमें से लगभग सभी सिर्फ पीएम मोदी को टारगेट कर रहे हैं। ऐसे फेक वीडियो में यह भी दिखाया जा रहा है कि पीएम स्टूडेंट्स के खिलाफ कैसे एक्शन लेना चाहते हैं।

 इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि यह सिस्टमैटिक टारगेटिंग है, जिसका साफ इरादा स्टूडेंट्स को सड़कों पर लाना है। वे स्टूडेंट्स को सड़कों पर वापस लाने के लिए उकसाने की कोशिश कर रहे हैं और इस बार सिर्फ प्रधानमंत्री को टारगेट कर रहे हैं। हाल के विरोध प्रदर्शन के दौरान, स्टूडेंट्स का ज्यादा ध्यान नीट पेपर लीक पर था। 

केंद्र सरकार ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ एक्शन लिया, जिसके बाद स्थिति शांत हो गई। अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तानी हैंडल पीएम मोदी को टारगेट कर रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि वे स्टूडेंट्स के जरिए भारत की सरकार बदल सकते हैं। बता दें, सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले स्टूडेंट्स के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। 

दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और महाराष्ट्र ने पिछले हफ्ते स्टूडेंट्स को यह भरोसा दिया गया था। गुरुवार को दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजधानी में नीट-यूजी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्रों के खिलाफ कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही है।

 सरकार ने प्रदर्शन से जुड़ी 13 एफआईआर में चल रही कार्यवाही को बंद करने का भी आदेश दिया है। एक अधिकारी ने कहा कि सरकार ने साफ संकेत दिया है कि वह टकराव नहीं, बल्कि समाधान चाहती है। सरकार के इस फैसले से आईएसआई-समर्थित तत्व निराश हो गए हैं और उन्होंने फर्जी वीडियो और दावे फैलाना तेज कर दिया है। 

 इन तत्वों ने पीएम मोदी के कई डीपफेक वीडियो सर्कुलेट किए हैं, जिनमें उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस डीपफेक वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी को यह कहते हुए सुना जा रहा है कि "भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा।" कई पाकिस्तानी यूजरों ने प्रधानमंत्री का एक पुराना वीडियो इस्तेमाल किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पेपर माफिया के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

 उस वीडियो में उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया को लेकर छात्रों से मिले सकारात्मक और रचनात्मक सुझावों के लिए उनका धन्यवाद भी किया था। इससे इतर पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक नया वीडियो साझा किया। इस वीडियो में वह विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ लगाए गए अपशब्द वाले नारों के बाद संयम और क्षमा की अपील की।

 ताजा वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "गाली देने से कुछ हल नहीं होता। आइए भटके हुए लोगों को सही रास्ता दिखाएं और साथ मिलकर काम करें। आइए भारत के लिए काम करें।" एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तानियों की निराशा यह है कि सरकार समाधान निकालने में कामयाब रही और विरोध प्रदर्शन खत्म हो गए। वे चाहते थे कि प्रदर्शन और लंबे समय तक चलें ताकि इससे व्यवस्था हिल जाए। 

 अधिकारी ने कहा कि यह पाकिस्तान की उस बड़ी साजिश का हिस्सा है जिसका मकसद लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार में लोगों का भरोसा हिलाना है। भारत में परेशानी पैदा करने के इरादे से ऐसे फर्जी वीडियो का प्रसार बढ़ाने का फैसला, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके), बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में उनकी खुद की समस्याओं से ध्यान भटकाने की एक चाल भी है।

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