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अजय राय बोले- मछली दावत साबित कर दें सीएम योगी, मैं इस्तीफा दे दूंगा

अजय राय बोले- मछली दावत साबित कर दें सीएम योगी, मैं इस्तीफा दे दूंगा

लखनऊ। भाजपा और एनडीए नेताओं के उस बयान पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने पलटवार किया है, जिसमें उन पर सावन के महीने में अयोध्या में मछली की दावत देने का आरोप लगाया गया है। अजय राय ने इस मामले में सफाई देते हुए भाजपा नेताओं को चेतावनी दी है।

अजय राय ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "राम निहाल निषाद ने सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें वह राम मंदिर में दर्शन के बाद शामिल हुए थे। राम निहाल अपने कार्यक्रम में क्या पका रहे थे और क्या खिला रहे थे, मुझे नहीं पता। वैसे निषाद समाज का भोजन ही मछली है। 

निषाद समाज के लोगों की अपने कार्यक्रमों में मछली खिलाने और खाने की परंपरा है। मैं सिर्फ कार्यक्रम में बुलावे पर गया था।" सीएम योगी ने बरेली की एक जनसभा में कहा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कल हनुमानगढ़ी में दर्शन करने जाते हैं और बाहर आकर मछली की दावत उड़ाते हैं, फिर राम-राम चिल्लाते हैं।

 बेशर्मी की भी एक सीमा होती है, इनके सामने गिरगिट भी शरमा जाता है। सीएम योगी के इस बयान पर अजय राय ने कहा, "मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जो बोल रहे हैं, वह साबित कर दें तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। अगर साबित नहीं कर पाए तो मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ेगा।" अजय राय ने कहा,"मैं सनातनी तो हूं। 

सनातन दिखावटी नहीं है, सनातन की पहचान जनेऊ है। ये लोग गेरुआ पहनकर और झूठ बोलकर लोगों को ठगने का काम करते हैं। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि पंकज चौधरी और सीएम योगी के पास मेरे मछली खाने का कोई प्रमाण हो तो दिखाएं, मैं इस्तीफा देने को तैयार हूं।" वहीं, कांग्रेस नेता शकील अहमद खान ने कहा, "ऐसा लगता है कि भारतीय जनता पार्टी को अपना ही इतिहास नहीं पता। 

हमने बंगाल चुनावों में देखा था कि भाजपा नेता कितने चाव से मांसाहारी भोजन कर रहे थे। वे हालात के हिसाब से वही करते हैं, जो उन्हें सही लगता है। जब प्रदेश अध्यक्ष एक निषाद परिवार से मिलने गए और जैसा कि आप जानते हैं, निषाद समुदाय मछुआरों का समुदाय है, वे मछली और मांस खाते हैं, तो वहां मछली परोसी गई। 

असल में, भारत में 70 से 80 प्रतिशत लोग मछली और मांस खाते हैं। यहां तक ​​कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेता भी इसे खाने के शौकीन हैं और बिहार के जिन नेताओं के साथ हमारा उठना-बैठना है, वे भी इसे खाते हैं।"

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