नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं बरसी पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई। सत्ता पक्ष ने इसे राष्ट्रीय एकता और विकास का प्रतीक बताया, तो विपक्ष ने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई।
वहां के लोग खुश हैं। सिर्फ कुछ राजनीतिक पार्टियों को, जो अपना राजनीतिक एजेंडा चला रही हैं, इससे दिक्कत है।
भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल ने इसे राष्ट्रीय एकता की दिशा में बड़ा कदम करार दिया। उन्होंने कहा, "भारत का अभिन्न अंग होने के बावजूद अनुच्छेद 370 की वजह से जम्मू-कश्मीर अलग-थलग पड़ा हुआ था।
आज हम गर्व और आत्मविश्वास के साथ कह सकते हैं कि 370 को हटाना देश की राष्ट्रीय एकता के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।"
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती द्वारा तिरंगे के अपमान को लेकर भाजपा सांसद सत शर्मा ने निशाना साधा। उन्होंने कहा, "महबूबा मुफ्ती ने एक बार कहा था कि अगर अनुच्छेद 370 हटा दिया गया तो तिरंगा उठाने वाला कोई नहीं बचेगा।
हम ऐसे लोगों से तिरंगे के सम्मान की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? हम उनसे राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? उनके लिए यह मायने न रखता हो लेकिन तिरंगे का अपमान एक गंभीर मामला है। जो भी उचित कानूनी कार्रवाई हो, अधिकारियों को वह करनी चाहिए।
"
वहीं, कांग्रेस सांसद पी. संतोष कुमार ने कहा, "आज 370 हटने की सातवीं बरसी है। सरकार ने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में दखल दिया है, फिर भी राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया गया है। हमारी मांग है कि सरकार इस दिशा में कदम उठाए।"
एमडीएमके सांसद दुरई वाइको ने 370 हटाने के फैसले को लोकतंत्र के खिलाफ बताया।
उन्होंने कहा, "यह संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने का मामला है। मेरा मानना है कि यह बहुत बड़ा अन्याय है। विपक्ष के हिस्से के तौर पर कांग्रेस और अन्य पार्टियां भी इस फैसले का विरोध करती हैं और हमने संसद में लगातार यह मुद्दा उठाया है।"





