चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय मंगलवार को चेन्नई के इलेक्ट्रिक बस प्रोग्राम के दूसरे चरण का उद्घाटन करेंगे। यह शहर में साफ-सुथरे और टिकाऊ पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम होगा।
शुरुआती चरण में अलंदूर डिपो से 130 एयर-कंडीशंड इलेक्ट्रिक बसें चलनी शुरू होंगी। मुख्यमंत्री मंगलवार को तमिलनाडु सचिवालय से इन सेवाओं की औपचारिक शुरुआत करेंगे। इस मौके पर वे सचिवालय परिसर से पांच इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी करेंगे।
बसों की संख्या बढ़ने से चेन्नई का पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क मजबूत होगा और यात्रियों के लिए सफर आसान और आरामदायक बनेगा। लो-फ्लोर डिजाइन की वजह से बुजुर्गों, दिव्यांगों और चलने-फिरने में दिक्कत महसूस करने वाले यात्रियों के लिए बसों में चढ़ना और उतरना आसान हो जाएगा।
यह पहल राज्य सरकार की उन व्यापक कोशिशों का हिस्सा है, जिनका मकसद चेन्नई मेट्रोपॉलिटन इलाके में गाड़ियों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना और वायु प्रदूषण की बढ़ती समस्या से निपटना है।
इलेक्ट्रिक बसों से कोई धुआं या हानिकारक गैसें नहीं निकलती हैं और इनसे शहर की डीजल से चलने वाले पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहनों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
इस प्रोग्राम के पहले चरण में एमटीसी ने व्यासरपाडी, पेरुम्बक्कम, पूनामल्ली, सेंट्रल डिपो और टोंडियारपेट प्रथम से 625 लो-फ्लोर इलेक्ट्रिक बसें चलानी शुरू कीं।
पहला चरण लगभग 697 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से पूरा किया गया।
दूसरे चरण के तहत योजनाबद्ध सभी 750 बसें जब चालू हो जाएंगी, तो दोनों चरणों को मिलाकर चेन्नई में इलेक्ट्रिक बसों की कुल संख्या 1,375 हो जाएगी।
इस बदलाव से ज़्यादा भीड़-भाड़ वाले रूट पर बसों की फ़्रीक्वेंसी बेहतर होने और यात्रियों को ज्यादा शांत और आरामदायक सफर का अनुभव मिलने की उम्मीद है।
दूसरे चरण के लिए चुने गए सात डिपो पर चार्जिंग की सुविधा और रखरखाव के इंतज़ाम जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए जा रहे हैं।
जरूरी सुविधाएं तैयार होने के साथ ही बसों को अलग-अलग बैच में उतारा जाएगा।
सरकार को उम्मीद है कि इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े के विस्तार से ईंधन की खपत और ऑपरेशनल एमिशन में काफ़ी कमी आएगी, साथ ही चेन्नई को साफ-सुथरे और पर्यावरण के प्रति ज्यादा जिम्मेदार शहरी ट्रांसपोर्ट सिस्टम की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी।





