लखनऊ। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल ऑफिस ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद तथा हरियाणा के फरीदाबाद सहित नौ जगहों पर छापा मारकर तलाशी ली। यह कार्रवाई फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लेने और उसे आगे पास करने से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले के सिलसिले में की गई।
अधिकारियों के अनुसार, यह मामला मेसर्स जंबुद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड से जुड़ा है। यह कंपनी कथित तौर पर नकली कागजात का इस्तेमाल करके बोगस आईटीसी बनाने और उसे फैलाने में शामिल थी।
जांचकर्ताओं को शक है कि कंपनी और उससे जुड़ी दूसरी कंपनियों ने धोखाधड़ी वाला टैक्स क्रेडिट बनाया और आगे भेजा, जबकि इनवॉइस और ई-वे बिल के हिसाब से सामान की कोई असली आवाजाही नहीं हुई थी।
अधिकारियों ने बताया कि जांच में बड़े पैमाने पर सर्कुलर ट्रांजेक्शन (आपस में ही पैसे का लेन-देन), फंड की तेजी से लेयरिंग (पैसे को कई खातों में घुमाना) और कई बोगस या अस्तित्वहीन कंपनियों के जरिए कैश निकालने की बात सामने आई है।
अधिकारियों ने कहा कि जांच में यह भी पता चला है कि कई बोगस या अस्तित्वहीन कंपनियों के जरिए कथित तौर पर कैश निकाला गया। इससे संकेत मिलता है कि धोखाधड़ी वाले आईटीसी ट्रांजेक्शन से मिले पैसे को इधर-उधर करने और लेयरिंग के लिए शेल कंपनियों (सिर्फ कागजों पर मौजूद कंपनियां) का इस्तेमाल किया गया होगा।
जांच में जीएसटी के अधिकारियों ने पाया है कि 9.63 करोड़ रुपये का आईटीसी गलत तरीके से लिया गया और 10.28 करोड़ रुपये का आईटीसी आगे ट्रांसफर किया गया, जिससे सरकारी खजाने को गलत तरीके से नुकसान हुआ।
पीएमएलए के तहत इसे अपराध से हुई कमाई माना जाता है।
ईडी की छापेमारी का मकसद गलत तरीके से किए गए आईटीसी ट्रांजेक्शन से हुई कथित अवैध कमाई का पता लगाना और उन लोगों और संस्थाओं की पहचान करना है जिन्हें इस संदिग्ध नेटवर्क से फायदा हुआ हो।
एजेंसी ऐसे दस्तावेजी और डिजिटल सबूत भी तलाश रही है, जिनसे जांचकर्ताओं को कथित धोखाधड़ी वाले आईटीसी नेटवर्क का पूरा ढांचा समझने और ट्रांजेक्शन में शामिल अलग-अलग संस्थाओं और फायदा उठाने वालों की भूमिका तय करने में मदद मिल सके।





