वाराणसी में गंगा का पानी बढ़ने से घाटों पर नावों का संचालन रोक दिया गया है। कई इलाकों में पानी घुस गया है। प्रशासन का प्रभावित इलाकों पर नजर रख रहा है। इसी बीच वाराणसी के अधिकारियों के पास फोन आया जिसने सभी को चौंका दिया। वाराणसी सांसद नरेंद्र मोदी ने मेयर और जिलाधिकारी से सीधे बात कर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। पीएम मोदी ने यह भी पूछा कि शहर में हालात कैसे हैं और राहत-बचाव के इंतजाम किस तरह चल रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ की वजह से आम लोगों को परेशानी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाए। पीएम मोदी ने अधिकारियों से ऐसे समय बात की है जब वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर चुका है।
केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक वाराणसी में गंगा का जलस्तर 70.29 मीटर दर्ज किया गया, जबकि चेतावनी का स्तर 70.26 मीटर है। अधिकारियों ने गंगा और वरुणा नदी के जलस्तर के साथ-साथ प्रभावित इलाकों और राहत व्यवस्था के बारे में पीएम मोदी को बताया। पीएम को बताया गया कि प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जलस्तर में बढ़ोतरी, जलभराव और वरुणा नदी के आसपास के इलाकों में पानी की स्थिति की निगरानी की जा रही है। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राहत कार्यों में किसी तरह की कमी नहीं रहनी चाहिए और नागरिकों को बाढ़ के कारण कम से कम असुविधा हो, यह सुनिश्चित किया जाए।
वाराणसी में चिंता सिर्फ गंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर नहीं है। वरुणा नदी के आसपास भी बाढ़ और जलभराव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन के मुताबिक करीब 11 इलाके और वार्ड आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं। वरुणा नदी में बाढ़ की वजह से करीब 328 परिवारों के 1,388 लोग प्रभावित हुए हैं। इन इलाकों में पानी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी रखी गई है।
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए प्रशासन ने 13 राहत शिविर तैयार किए हैं।
इन शिविरों में फिलहाल प्रभावित 219 परिवारों के 935 लोग रह रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि हालात के मुताबिक जरूरत पड़ने पर और लोगों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को लगातार अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी निशान से ऊपर पहुंच गया है, लेकिन अभी यह खतरे के निशान से नीचे है। यही वजह है कि प्रशासन इसे लगातार निगरानी वाली स्थिति मानकर चल रहा है। नदी के जलस्तर में लगातार बदलाव होने के कारण प्रशासन किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। घाटों और नदी किनारे रहने वाले लोगों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।