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भारतीय तटरक्षक बल का साहसिक अभियान: अंडमान-निकोबार के समुद्र में फंसी अमेरिकी नौका 'सी एंजेल' के दो यात्रियों को बचाया गया


अत्यंत विषम परिस्थितियों में किया गया अंतरराष्ट्रीय समुद्री बचाव अभियान, भारतीय समुद्री क्षमता और संवेदनशीलता का अद्भुत उदाहरण      

पोर्ट ब्लेयर, 11 जुलाई 2025 | भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard - ICG) ने एक बार फिर समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अपनी अद्वितीय तत्परता और साहस का परिचय देते हुए, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के दक्षिण-पूर्वी समुद्र में फंसी एक अमेरिकी नौका 'Sea Angel' को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की। यह घटना न केवल तकनीकी दक्षता और मानवीय संवेदना का प्रमाण है, बल्कि भारत की वैश्विक समुद्री उत्तरदायित्वों के प्रति प्रतिबद्धता का भी परिचायक है।

संकट का संदेश और तत्परता की शुरुआत

10 जुलाई 2025 को सुबह ठीक 11:57 बजे, पोर्ट ब्लेयर स्थित समुद्री राहत समन्वय केंद्र (MRCC) को एक डिस्ट्रेस अलर्ट प्राप्त हुआ। यह संदेश अमेरिकी नौका 'सी एंजेल' की ओर से भेजा गया था, जो कि अंडमान के अंतिम छोर इंदिरा पॉइंट से 52 नॉटिकल माइल दक्षिण-पूर्व दिशा में बेहद खराब मौसम की चपेट में आ गई थी। नौका पर दो चालक दल सदस्य सवार थे और यह बताया गया कि नौका का पाल फट चुका है तथा प्रोपेलर समुद्री मलबे में उलझ गया है, जिससे नौका पूरी तरह से निष्क्रिय हो गई है।

अंतरराष्ट्रीय चेतावनी प्रणाली की सक्रियता

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए MRCC पोर्ट ब्लेयर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इंटरनेशनल सेफ्टी नेट (ISN) को सक्रिय कर दिया, जिससे सभी निकटवर्ती व्यापारिक जहाजों और तटरक्षक इकाइयों को सतर्क किया गया। इसके साथ ही, राहत एवं बचाव की दिशा में प्रोटोकॉल के तहत समन्वय प्रणाली शुरू कर दी गई।

ICGS राजवीर का त्वरित प्रस्थान और जोखिम भरा अभियान

ICG ने तुरंत तटरक्षक पोत ICGS राजवीर को दोपहर 2:00 बजे राहत कार्य के लिए रवाना किया। खराब मौसम, समुद्री तूफान और अत्यधिक लहरों के बीच करीब 3.5 घंटे की संघर्षपूर्ण यात्रा के बाद शाम 5:30 बजे ICGS राजवीर संकटग्रस्त नौका के समीप पहुंचा। वहाँ उसने चालक दल से रेडियो संपर्क स्थापित किया और स्थिति का मूल्यांकन किया।

स्वास्थ्य सुरक्षित, पर स्थिति चुनौतीपूर्ण

हालांकि 'सी एंजेल' तकनीकी रूप से निष्क्रिय हो चुकी थी, लेकिन राहत की बात यह रही कि उस पर सवार दोनों अमेरिकी नागरिक स्वस्थ और मानसिक रूप से स्थिर पाए गए। भारी हवाएं, तेज लहरें और सीमित दृश्यता के बावजूद ICG के जवानों ने अत्यंत संयम और दक्षता के साथ नौका की स्थिति को संभाला।

सफल टोइंग ऑपरेशन और सुरक्षित वापसी

करीब 6:50 बजे, ICGS राजवीर ने 'सी एंजेल' को रस्सियों से खींचना शुरू किया और उसे अपने साथ कैंपबेल बे ले जाने की प्रक्रिया शुरू की। यह कठिन और सावधानीपूर्वक चलाया गया ऑपरेशन लगभग 13 घंटे तक चला और अंततः 11 जुलाई की सुबह 8:00 बजे नौका को कैंपबेल बे बंदरगाह पर सुरक्षित रूप से लाकर पहुंचाया गया।

भारतीय तटरक्षक बल की भूमिका और संदेश

यह अभियान न केवल तकनीकी और रणनीतिक दक्षता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारतीय तटरक्षक बल सीमा पार मानवीय सहायता, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय उत्तरदायित्वों के निर्वहन में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। 'सी एंजेल' जैसे संकटग्रस्त विदेशी नौका की सुरक्षित वापसी यह साबित करती है कि भारत की समुद्री एजेंसियां न केवल अपने नागरिकों, बल्कि वैश्विक समुद्री समुदाय की भी रक्षक बन चुकी हैं।

 समर्पण, सेवा और सुरक्षा का संदेश

अंडमान-निकोबार के दूरस्थ क्षेत्र में इस प्रकार का समुद्री बचाव अभियान कई मायनों में ऐतिहासिक और प्रेरणादायक है। यह भारत की ब्लू इकोनॉमी, समुद्री रणनीति और मानवीय दृष्टिकोण का जीवंत उदाहरण है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर भारतीय तटरक्षक बल को दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र की प्रमुख समुद्री राहत एजेंसी के रूप में स्थापित किया है।यह सफल अभियान न केवल उन दो अमेरिकियों के लिए जीवनदायिनी सिद्ध हुआ, बल्कि यह भी दिखाता है कि जब बात मानव जीवन की रक्षा की हो, तो भारत कभी पीछे नहीं हटता — चाहे वो कोई भी देश, कोई भी समुद्र या कोई भी परिस्थिति क्यों न हो।


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