नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और सुरक्षा खामियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) से कड़े सवाल पूछे हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि आखिर बार-बार परीक्षा के पेपर कैसे लीक हो रहे हैं और इसे रोकने के लिए अब तक प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जा सकी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर होता है। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों के विश्वास को कमजोर करती हैं। अदालत ने केंद्र से पूछा कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
सुनवाई के दौरान एनटीए ने अदालत को बताया कि परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। एजेंसी ने कहा कि प्रश्नपत्रों के अनुवाद में करीब 85 प्रतिशत तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग किया गया और देशभर में 1,000 से अधिक सुरक्षित केंद्र बनाए गए थे। इसके अलावा निगरानी और डेटा सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए।
हालांकि अदालत ने इस पर चिंता जताई कि तमाम दावों के बावजूद पेपर लीक और गड़बड़ियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि सुरक्षा व्यवस्था इतनी मजबूत है तो फिर हर साल इस तरह के विवाद क्यों खड़े हो जाते हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान छात्रों और अभिभावकों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की मांग भी उठाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और एनटीए से विस्तृत जवाब मांगा है और संकेत दिए हैं कि परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर सख्त निर्देश दिए जा सकते हैं।