रेल मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने के लिए कुल ₹675 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी है। इन प्रोजेक्ट्स का मकसद रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना, कनेक्टिविटी बेहतर करना, माल ढुलाई की रफ़्तार बढ़ाना और ट्रेन के संचालन को ज़्यादा सुरक्षित बनाना है। मंज़ूर किए गए प्रोजेक्ट्स में पश्चिम बंगाल में 11 किलोमीटर लंबी नई बाईपास लाइन का निर्माण, बिहार के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाना और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद डिवीज़न के बाकी हिस्सों में 'कवच 4.0' (KAVACH 4.0) लागू करना शामिल है।
पश्चिम बंगाल में, आद्रा एंड और जयचंडी पहाड़ के बीच 11 किलोमीटर लंबी बाईपास लाइन बनाने की मंज़ूरी मिल गई है। साउथ ईस्टर्न रेलवे ज़ोन के तहत आने वाले इस प्रोजेक्ट पर ₹272 करोड़ का खर्च आएगा। रेलवे के मुताबिक, यह बाईपास मुख्य रूप से मालगाड़ियों के लिए एक वैकल्पिक और डेडिकेटेड रूट देगा। इसके साथ बनने वाली तीसरी लाइन दोनों तरफ़ से कनेक्टिविटी देगी, जिससे इस रूट पर मालगाड़ियों की आवाजाही को बेहतर ढंग से मैनेज करने में मदद मिलेगी। रेलवे के अनुसार, यह बाईपास रोज़ाना लगभग 6.065 मालगाड़ी रेक की आवाजाही में मदद करेगा, जिससे इस इलाके में बढ़ते इंडस्ट्रियल ट्रैफिक की ज़रूरतें भी पूरी होंगी।
यह प्रोजेक्ट SAIL की लगभग 23.40 MTPA आयरन ओर की ज़रूरत और BCCL के रोज़ाना 45 रेक (मालगाड़ी के डिब्बों) के संभावित मूवमेंट से जुड़े माल ढुलाई में भी मदद करेगा। रेलवे ने बताया कि आद्रा-जॉयचंडी पहाड़-सांका बाईपास से मौजूदा ऑपरेशनल रुकावटें कम होंगी और आद्रा-जॉयचंडी पहाड़ सेक्शन में लेवल क्रॉसिंग की वजह से होने वाली देरी को कम करने में मदद मिलेगी।
बिहार में, ईस्ट सेंट्रल रेलवे के समस्तीपुर डिवीज़न के तहत 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाने की मंज़ूरी दी गई है। इस प्रोजेक्ट की लागत ₹233 करोड़ है। इस पहल के तहत, इन स्टेशनों पर मौजूद पुराने पैनल इंटरलॉकिंग सिस्टम को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग टेक्नोलॉजी से बदला जाएगा, जिससे डिवीज़न का सिग्नलिंग सिस्टम और भी आधुनिक और भरोसेमंद हो जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग एक कंप्यूटर-बेस्ड सिग्नलिंग सिस्टम है जो पुराने रिले-बेस्ड सिस्टम की जगह लेता है।
इस अपग्रेड से सिग्नलिंग की खराबी का तेज़ी से पता लगाने, रखरखाव को आसान बनाने और ट्रेन मैनेजमेंट में ज़्यादा ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी मिलने की उम्मीद है। इससे 'कवच' (KAVACH) सिस्टम को लागू करने के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में भी मदद मिलेगी। 'कवच' भारत का अपना ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जिसे रेल सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए विकसित किया गया है। उत्तर प्रदेश में, रेलवे ने नॉर्दर्न रेलवे के तहत मुरादाबाद डिवीज़न के बाकी 712 रूट किलोमीटर पर 'कवच 4.0' (KAVACH 4.0) लगाने को मंज़ूरी दे दी है।
इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹170 करोड़ है। 'कवच 4.0' लगाने से पूरे इलाके में ट्रेन चलाने की सुरक्षा मज़बूत होगी, क्योंकि इससे ट्रेन ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा की एक अतिरिक्त और आधुनिक परत मिलेगी। मुरादाबाद डिवीज़न के बाकी हिस्सों में 'कवच' का काम पूरा होने के बाद, इस नेटवर्क पर सुरक्षा व्यवस्था और भी मज़बूत होने की उम्मीद है।