केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील 'सिलीगुड़ी कॉरिडोर'—जिसे आम भाषा में 'चिकन नेक' कहा जाता है—की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से अभेद्य बनाने के लिए एक ऐतिहासिक पहल की है। उन्होंने इस रणनीतिक इलाके को हर तरह के संभावित खतरों से सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष 'त्रिकोणीय सुरक्षा ग्रिड' की स्थापना की घोषणा की। सिलीगुड़ी में सशस्त्र सीमा बल के उत्तर बंगाल फ्रंटियर मुख्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री ने करीब 189 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न प्रशासनिक, अवसंरचनात्मक और आवासीय परियोजनाओं का उद्घाटन किया और कई नए ढांचागत कार्यों की आधारशिला रखी।
अमित शाह ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह पूर्वोत्तर के आठों राज्यों को शेष भारत से जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण संकरा भू-भाग है। इसकी रणनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए देश की रक्षा एजेंसियों का ध्यान हमेशा इस पर केंद्रित रहता है। तैयारियों को बहुस्तरीय और मजबूत बनाने के लिए गृह मंत्रालय ने तीन नए सैन्य गैरीसन (सैन्य छावनी) स्थापित करने का निर्णय लिया है: धुबरी (असम), किशनगंज (बिहार), चोपड़ा (पश्चिम बंगाल)। इन तीनों रणनीतिक बिंदुओं को मिलाकर एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड तैयार किया जा रहा है। यह ग्रिड न केवल पूरे कॉरिडोर पर थल सेना, अर्धसैनिक बलों और स्थानीय पुलिस की निगरानी क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा, बल्कि किसी भी आपातकालीन परिस्थिति या विदेशी खतरे का त्वरित जवाब देने के लिए सैन्य उपस्थिति को अधिक प्रभावी बनाएगा।
गृह मंत्री ने 1965 में स्थापित सशस्त्र सीमा बल (SSB) की निस्वार्थ सेवाओं की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने याद दिलाया कि एसएसबी 2001 से भारत-नेपाल और 2004 से भारत-भूटान की खुली व मित्रवत सीमाओं की रक्षा अत्यंत कुशलता और सतर्कता के साथ कर रहा है। सुरक्षा बलों की अंतर-एजेंसी परिचालन क्षमता को परखने के लिए उन्होंने इस क्षेत्र में नियमित रूप से आयोजित होने वाले 'तीस्ता प्रहार' जैसे सामरिक अभ्यासों की आवश्यकता और महत्व को भी रेखांकित किया। राष्ट्रीय सुरक्षा के इस बड़े खाके को व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण से जोड़ते हुए शाह ने 2047 तक भारत को एक 'विकसित राष्ट्र' बनाने के संकल्प को दोहराया। इसके लिए उन्होंने 'सप्त धारा' (सात मुख्य स्तंभों) की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें शामिल हैं: रक्षा शक्ति का सुदृढ़ीकरण, अत्याधुनिक तकनीक का समावेशन, अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) विकास, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) को बढ़ावा, सीमावर्ती क्षेत्रों में भूमि विवादों का निस्तारण। सीमावर्ती इलाकों में लंबित भूमि विवादों को सुलझाने में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सुरक्षित सीमाएं ही समृद्ध भारत का आधार हैं। इस कार्यक्रम में गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, एसएसबी के शीर्ष कमांडरों और विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।